Economic Survey 2021: आज से बजट सत्र की शुरुआत हो गई है, लेकिन आर्थिक सर्वे पेश किए जाने के बाद संसद दो दिनों के लिए स्थगित कर दी गई है. अब 1 फरवरी को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट पेश किया जाएगा. आज वित्त मंत्री ने लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2021 पेश किया.Also Read - एसएंडपी ने भारत का वृद्धि पूर्वानुमान घटाकर 7.3 फीसदी किया, महंगाई बनी चिंता की बड़ी वजह

कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार आर्थिक सर्वे इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मैट में सभी सांसदों को उपलब्ध कराया गया. इस सर्वे में देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति से अवगत कराया गया है. Also Read - अमेरिका-रूस की आबादी के बराबर भारतीय नौकरी की तलाश में भी नहीं, आंकड़ों में घटी बेरोजगारी: CMIE डेटा

सर्वे में बताया गया कि मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 में 7.7 फीसदी के संकुचन का अनुमान है और अप्रैल 2021 से शुरू होने वाले आगामी वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में तेजी से रिकवरी होने की उम्मीद है. Also Read - विश्व बैंक ने पाकिस्तान की वृद्धि का अनुमान घटाकर 4.3 फीसदी किया, पिछले साल से है एक फीसदी कम

आइए, जानते हैं आर्थिक सर्वे की 10 बड़ी बातें-

आगामी वित्त वर्ष में भारत तेजी से आगे बढ़ेगा. वित्त वर्ष 2022 में नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP) का अनुमान 15.4 फीसदी पर रखा गया है. इसके अलावा वित्त वर्ष 2022 में रियल जीडीपी (Real GDP) ग्रोथ का अनुमान 11 फीसदी पर रखा गया है.

कोरोना महामारी के प्रकोप से अर्थव्यवस्था तेजी से बाहर निकल रही है. भारतीय अर्थव्यवस्था में V-Shape की रिकवरी देखने को मिली है. सर्वे में बताया गया कि कोविड-19 को देखते हुए समय पर लॉकडाउन लागू होने के चलते ही अर्थव्यवस्था में V-Shape रिकवरी दिखी है.

आर्थिक सर्वे 2021 में कहा गया है कि निवेश बढ़ाने वाले कदमों पर जोर रहेगा. ब्याज दर कम होने से कारोबारी गतिविधियां बढ़ेंगी. इसमें बताया गया कि कोरोना वैक्सीन से महामारी पर काबू पाना संभव है और आगे इकोनॉमिक रिकवरी के लिए ठोस कदम उठाए जाने की उम्मीद है.

आर्थिक सर्वे में कहा गया, ‘भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग्स इकोनॉमी के फंडामेंटल्स के बारे में जानकारी नहीं देती हैं. इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को BBB-/Baa3 की रेटिंग मिली हो. भारत की वित्तीय नीति का फंडामेंटल मजबूत है. सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाया जाना चाहिए.’

2019-20 के अस्थायी आंकड़ों के लिए वित्तीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.6 फीसदी है, जो 2019-20 के संशोधित अनुमानों में कल्पना किए गए वित्तीय घाटे से 0.8 फीसद तथा 2018-19 में राजकोषीय घाटे से 1.2 फीसदी अधिक है. 2018-19 की तुलना में 2019-20 के अस्थायी आंकड़ों में प्रभावी राजस्व घाटा जीडीपी का 1 फीसदी बढ़कर जीडीपी का 2.4 फीसदी हो गया.

कॉरपोरेट और व्यक्तिगत आयकर 2019-20 के अस्थायी आंकड़ों में कम हो गया है. इसका कारण मुख्य रूप से कॉर्पोरेट कर दर में कटौती जैसे संरचनात्मक सुधारों को लागू करने के कारण विकास में आई गिरावट रही, लेकिन राजस्व में रिकवरी प्रत्यक्ष है, क्योंकि मासिक सकल जीएसटी राजस्व संग्रह पिछले तीन महीनों से लगातार एक लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर रहा है. दिसंबर, 2020 के लिए मासिक जीएसटी राजस्व दिसंबर, 2019 के मुकाबले जीएसटी राजस्व में 12 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज करने के बाद 1.15 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंचा है. यह जीएसटी लागू होने के बाद जीएसटी कर संग्रह का सबसे अधिक मासिक संग्रह है.

भारत सरकार ने 23 दिसंबर 2020 तक 41,061 स्टार्टअप्स को मान्यता प्रदान की है. देश में 39,000 से अधिक स्टार्टअप्स के माध्यम से 4,70,000 लोगों को रोजगार मिला है. एक दिसंबर 2020 तक SIDBI ने सेबी के पास रजिस्टर्ड 60 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AFIs) को 4,326.95 करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई है. यह स्टार्टअप्स के लिए फंड ऑफ फंड्स के जरिए जारी किया जाए, जिसमें कुल 10,000 करोड़ रुपये का फंड है.

अक्टूबर, 2020 में प्रकाशित वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (एएसईआर)-2020 चरण-1 (ग्रामीण) का उल्‍लेख करते हुए कहा गया है कि ग्रामीण भारत में सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में नामांकित विद्यार्थियो के पास स्मार्ट फोन की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है. 2018 में 36.5 फीसदी विद्यार्थियों के पास ही स्मार्ट फोन थे, वहीं 2020 में 61.8 फीसदी विद्यार्थियों के पास स्मार्ट फोन मौजूद थे. सर्वे में सलाह दी गई है कि उचित उपयोग किया गया तो शहरी और ग्रामीण, लैंगिक, उम्र और आय समूहो के बीच डिजिटल भेदभाव और शैक्षिक परिणाम में अंतर समाप्त होगा.

भारत में अगले दशक तक विश्व में सर्वाधिक युवाओं की जनसंख्या होगी. इसलिए देश का भविष्य तैयार करने के लिये इन युवाओं के लिये उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने की क्षमता विकसित करना है. सर्वे के अनुसार, भारत ने प्राथमिक स्कूल स्तर पर 96 फीसद साक्षरता दर हासिल कर ली है.

15 से 59 वर्ष की उम्र के कामगारों में से केवल 2.4 फीसद लोगों ने ही व्यावसायिक/तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया है और 8.9 फीसदी अन्य लोगो ने अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षण प्राप्त किया है. इन 8.9 प्रतिशत कामगारों में से 3.3 फीसद ने कार्य के दौरान प्रशिक्षण प्राप्त किया, 2.5 फीसदी लोगों ने स्व-प्रशिक्षण और 2.1 फीसदी लोगों ने वंशानुगत तथा एक फीसदी लोगों ने अन्य स्रोतों से प्रशिक्षण प्राप्त किया.