Economic Survey 2023-24: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज पेश करेंगी आर्थिक सर्वे, जानें- क्या है इसका महत्व?

Economic Survey 2023-24: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद के पटल पर आर्थिक सर्वे रखेंगी. आर्थिक सर्वे बजट से एक दिन पहले पेश किया जाता है.

Published date india.com Updated: July 22, 2024 10:38 AM IST
Economic Survey 2023-24: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज पेश करेंगी आर्थिक सर्वे, जानें- क्या है इसका महत्व?

Economic Survey 2023-24: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद के मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार (22 जुलाई) को आर्थिक सर्वे 2023-24 जारी करेंगी. यह सर्वे आम तौर पर 31 जनवरी को आता है, जो वित्त मंत्री के अगले वित्त वर्ष के लिए पेश किए जाने वाले बजट से एक दिन पहले आता है.

चुनावी साल में सरकार अपनाती है दूसरा तरीका

जिस साल आम चुनाव कराए जाते हैं उस साल सरकार अलग तरीका अपनाती है और “भारतीय अर्थव्यवस्था – एक समीक्षा” टाइटल से एक छोटी रिपोर्ट पेश करती है और फरवरी में अंतरिम बजट पेश करती है. संसद के विघटन और चुनावों के समापन के बाद, नई चुनी हुई सरकार वित्त वर्ष के लिए एक व्यापक आर्थिक सर्वे और बजट पेश करती है.

क्या है आर्थिक सर्वे?

आर्थिक सर्वे वित्त वर्ष में राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की स्थिति की एक विस्तृत रिपोर्ट होती है जो समाप्त होने वाली है. इसे मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में केंद्रीय वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग (DEA) के आर्थिक प्रभाग द्वारा तैयार किया जाता है. एक बार तैयार होने के बाद, सर्वे को वित्त मंत्री द्वारा अप्रूव किया जाता है.

कब पेश हुआ पहला आर्थिक सर्वे?

पहला आर्थिक सर्वे 1950-51 में प्रस्तुत किया गया था और 1964 तक इसे बजट के साथ प्रस्तुत किया जाता था.

इसी तरह, सबसे लंबे समय तक, सर्वे को केवल एक सेगमेंट में पेश किया गया था, जिसमें अर्थव्यवस्था के अलग-अलग प्रमुख सेक्टर्स जैसे कि सर्विस, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग, साथ ही फिस्कल डेवलपमेंट, रोजगार की स्थिति और महंगाई आदि जैसे प्रमुख पॉलिसी सेक्टर्स को समर्पित खास अध्याय होते थे. इस सेगमेंट में एक डिटेल्ड स्टैटिकल समरी भी होती थी.

2010-2011 में हुई एक नई शुरुआत

2010-11 और 2020-21 के बीच, सर्वे दो सेगमेंट में प्रस्तुत किया गया था. एडिशनल सेगमेंट में सीईए की बौद्धिक छाप थी और अक्सर अर्थव्यवस्था के सामने आने वाले कुछ प्रमुख मुद्दों और बहसों से निपटा जाता था.

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2022-23 से, सर्वे एक ही सेगमेंट के प्रारूप में वापस आ गया. इसे उस समय तैयार और प्रस्तुत किया गया, जब सीईए के कार्यालय में बदलाव किया गया था और वर्तमान सीईए – वी अनंत नागेश्वरन – ने सर्वे जारी होने पर कार्यभार संभाला था.

क्या है आर्थिक सर्वे का महत्व?

भले ही यह बजट से ठीक एक दिन पहले आता है, लेकिन सर्वे में किए गए आकलन और सिफारिशें बजट पर बाध्यकारी नहीं हैं.

फिर भी, सर्वे केंद्र सरकार के भीतर से किए जाने वाले अर्थव्यवस्था का सबसे आधिकारिक और व्यापक विश्लेषण बना हुआ है. इसके अवलोकन और विवरण भारतीय अर्थव्यवस्था का विश्लेषण करने के लिए एक आधिकारिक रूपरेखा प्रदान करते हैं.

इस साल पेश किए जाने वाले सर्वे में क्या देखना चाहिए?

भारतीय अर्थव्यवस्था 2017-18 से तेज गति से बढ़ने के लिए संघर्ष कर रही है. कोविड-19 महामारी के तुरंत बाद के वर्षों में भले ही तेज विकास दर दर्ज की गई हो, लेकिन यह एक स्टै्स्टिकल भ्रम था. कई बाहरी अर्थशास्त्रियों ने तर्क दिया है कि भारत की संभावित वृद्धि 8% से गिरकर 6% हो गई है.

इस साल जुलाई में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2024-25 के लिए भारत के विकास पूर्वानुमान को 6.8% से संशोधित कर 7% कर दिया, जो चुनौतीपूर्ण वैश्विक और घरेलू आर्थिक गतिशीलता के बावजूद, खासकरके ग्रामीण भारत में निजी खपत में सुधार के कारण वृद्धि थी. आईएमएफ की विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट ने भी 2025-26 में भारत के लिए 6.5% जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है.

चुनौतियां कायम

कोविड के दौरान अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक रूप से बढ़ती बेरोजगारी और गरीबी और असमानता में तेज वृद्धि देखी गई. असंगठित क्षेत्र में रोजगार का यह नुकसान महत्वपूर्ण रहा है, पिछले सात वर्षों में कई अनौपचारिक इकाइयां बंद हो गई हैं और लगभग 16.45 लाख नौकरियां चली गई हैं. यह जानकारी एन्युअल सर्वे ऑफ अनइनकॉरपोरेटेड एंटरप्राइजेज (ASUSE) के हालिया आंकड़ों से मिली है.

इस सर्वे से भारतीय अर्थव्यवस्था में आर्थिक सुधार की वास्तविक सीमा का पता लगाने और भारत की विकास क्षमता का आकलन करने की उम्मीद है. इससे फ्यूचर के आउटलुक को चित्रित करने और नीतिगत समाधान सुझाने की उम्मीद की जा सकती है. उदाहरण के लिए, देश में विनिर्माण विकास को बढ़ावा देने के लिए क्या किया जा सकता है? ऐसे समय में जब वैश्विक विकास और विश्व व्यापार दोनों ही सुस्त हैं, भारत कैसे तेज़ी से विकास करना जारी रख सकता है?

अंत में, यह सर्वेक्षण, अपने पूर्ववर्ती की तरह, सीईए नागेश्वरन की छाप को दर्शाएगा. इस प्रकार, इसमें ऐसे अध्याय हो सकते हैं जो अर्थव्यवस्था के समक्ष प्रमुख मुद्दों और चुनौतियों तथा उनके संभावित समाधानों का विश्लेषण करेंगे.

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