नई दिल्ली: ईडी ने बैंक धोखाधड़ी के एक मामले में धन शोधन की जांच के संबंध में वडोदरा स्थित कंपनी डीपीआईएल प्राइवेट लिमिटेड की विंड मिल्स और एक निर्माणाधीन होटल समेत 1,122 करोड़ रुपए तक की संपत्ति कुर्क की है. ईडी ने मंगलवार को बताया कि डायमंड पॉवर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (डीपीआईएल ) विभिन्न बैंकों से 2,654 करोड़ रुपए तक की धोखाधड़ी की आरोपी है.

ईडी ने सीबीआई की एफआईआर करने के बाद एंटी मनी लॉन्डरिंग के तहत कंपनी और उसके प्रोमोटरों के खिलाफ क्रिमनल केस दर्ज किया था. इसके तुरंत बाद पिछले महीने कंपनी के ठिकानों पर तलाशी ली थी. ईडी का कहना है कि कंपनी ने फर्जी लेनदेन दिखाकर बैंकों के साथ 2654.40 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की है.

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा,” डीपीआईएल और उससे संबंधित कंपनियों जैसे कि डायमंड पॉवर ट्रांसफॉर्मर लिमिटेड , डायमंड प्रोजेक्ट्स लिमिटेड, मेफेयर लेजर्स और नॉर्थवे स्पेसिस की अस्थायी आदेश के तौर पर संपत्ति कुर्क कर ली है.”

ये संपत्ति जब्त

ईडी ने कहा, संपत्तियों में संयंत्र, मशीनरी , इमारत और जमीन, भुज में तीन विंडमिल्स , भटनागर परिवार के आवासीय बंगले-फ्लैट, बिना बिके हुए फ्लैट्स, निर्माणाधीन होटल और अन्य जमीन शामिल हैं. डीपीआईएल की ये सभी संपत्तियां वडोदरा में है. ’’

लेटर ऑफ क्रेडिट से भी की धोखाधड़ी
डीपीआईएल ने अपनी संबंधित संस्थाओं के जरिए धोखाधड़ी कर के 261 करोड़ रुपए तक की राशि हासिल की. उसने बैंकों से लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी ) की सुविधा को तोड़ मरोड़कर यह निधि हासिल की.

यहां लगाया पैसा
कंपनी ने कर्ज और नकद के रूप में हासिल बड़ी राशि को नॉर्थवे स्पेसिस और मेफेयर लेजर्स जैसी रियल एस्टेट कंपनियों में भी लगाया.

बैंकों से 2654.40 करोड़ की धोखाधड़ी
ईडी ने कहा, ”ऐसा प्रतीत होता है कि डायमंड समूह की कंपनियों की वास्तविक व्यापारिक गतिविधि बहुत कम रही और रिकॉर्डों में दिखाया गया ज्यादातर व्यापार ऐसे फर्जी लेनदेन से किया गया और इससे बैंकों के साथ 2654.40 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई.”

कालेधन का पता लगाने के लिए जांच
ईडी इस बात की जांच कर रहा है कि क्या ये कर्ज गैरकानूनी संपत्तियां और काला धन बनाने में इस्तेमाल किया गया.

बाप बेटे हैं कंपनी के प्रमोटर्स
सीबीआई ने कहा था कि बिजली की केबल और उपकरण बनाने वाली डीपीआईएल को एसएन भटनागर और उनके बेटे अमित भटनागर और सुमित भटनागर प्रोमोट करते हैं, जो इस कंपनी के कार्यकारी अधिकारी भी हैं. ( इनपुट एजेंसी)