नई दिल्ली: भारत सरकार इलेक्ट्रिक गाड़ियों में ग्रीन रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लगाने पर विचार कर रही है. ताकि इलेक्ट्रिक गाड़ियों को आम गाड़ियां से अलग रखने में मदद मिल सके. इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लगी ग्रीन रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट से इन गाड़ियों को खास प्राथमिकता मिलेगी. इसके अलावा ऐसी गाड़ियों को टोल पर भी स्‍पेशल छूट मिलने के साथ स्पेशल पार्किंग जोन मुहैया कराया जा सकता है. यह जानकारी हिन्‍दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में दी गई है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय जल्द ही इसको लेकर एक आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगा और विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इन नई संख्या प्लेटों के विनिर्देशों पर अधिक जानकारी देगा. मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पंजीकरण प्लेटों में हरे रंग की पृष्ठभूमि होगी, जिसमें सफेद और वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक वाहनों में पाठ के साथ पीले रंग के पाठ के साथ हरी पृष्ठभूमि होगी. भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स लाने की पूरी जिम्मेदार सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग के ऊपर है. नीति आयोग इसको लेकर अलग-अलग पॉलिसीज बना रहा है, जो कि इन गाड़ियों के सड़कों पर आने की रफ्तार को बढ़ाएगा. नीति आयोग का कहना है कि मौजूदा समय में किसी नेशनल इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी की जरूरत नहीं है. फिलहाल, नीति आयोग और मिनिस्ट्री ऑफ पावर, रोड ट्रांसपोर्ट एंड हेवी इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के मेंबर्स मिलकर भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए फ्रेमवर्क तैयार कर रहे हैं.

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भारत में चार तरह के नंबर प्‍लेट चलन में
देश में वर्तमान समय में चार तरह की नंबर प्लेट चलन में हैं. पर्सनल पैसेंजर व्हीकल्स की नंबर प्लेट में व्हाइट बैकग्राउंड और ब्लैक टेक्स्ट होता है. वहीं, पीले बैकग्राउंड और काले टेक्स्ट वाली नंबर प्लेट कमर्शियल व्हीकल्स के लिए है. जबकि काले बैकग्राउंड और पीले टेक्स्ट वाली नंबर प्लेट रेंटल व्हीकल्स के लिए है. वहीं, नीले बैकग्राउंड पर व्हाइट टेक्स्ट वाली नंबर प्लेट हाई कमिश्नर्स और एम्बेसीज के लिए है. इसके अलावा, डिफेंस में इस्तेमाल किए जाने वाले और डिफेंस मिनिस्ट्री द्वारा अधिकृत गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन प्रोसेस अलग होती है. वहीं, राष्ट्रपति और राज्यों के गवर्नर की गाड़ियों में केवल राष्ट्रीय प्रतीक और रेड नंबर प्लेट होती है.

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इलेक्ट्रिक वाहनों पर कम है जीएसटी, 2030 तक सभी वाहन होंगे इलेक्ट्रिक
इलेक्ट्रिक वाहन 2017-18 में भारत में श्रेणियों में बेचे गए 24 मिलियन वाहनों में से एक% से कम रहा, लेकिन ऐसे वाहनों के सबसे बड़े निर्माताओं महिंद्रा एंड महिंद्रा सहित निर्माताओं का मानना है कि यह जल्द ही सबसे तेज़ी से बढ़ रहे बाजार का हिस्‍सा होगा. महिंद्रा इलेक्ट्रिक के सीईओ महेश बाबू ने कहा कि ईवीएस के लिए ग्रीन नंबर प्लेट्स रखने का प्रस्ताव एक अच्छी पहल है, क्योंकि बिजली गतिशीलता का भविष्य होगा. यह हरी गतिशीलता को अलग करने और समर्थन करने में मदद करता है. यह नॉर्वे जैसे देशों में है. उद्योग के प्रतिनिधियों ने कहा कि अगर ईवी बाजार को बढ़ावा दिया जाना है, तो सरकार को अधिक प्रोत्साहन देना होगा. अन्यथा, ऐसे वाहनों की लागत कम करना मुश्किल होगा. हालांकि इलेक्ट्रिक वाहन के लिए जीएसटी (माल और सेवा कर) 12% पर तय किया गया है, जबकि अन्य वाहनों के लिए 28% है. नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन के मुताबिक, सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए 2030 टाइमलाइन निर्धारित की है कि भारत के सभी वाहन विद्युत होंगे.