टैक्स सेविंग के लिए ELSS और NPS: लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न और छूट का सही संयोजन

ELSS और NPS टैक्स बचत के प्रभावी उपाय हैं. ELSS में 3 साल की लॉक-इन अवधि और 11-12% रिटर्न मिलता है, जबकि NPS में 50,000 रुपये का अतिरिक्त योगदान टैक्स छूट प्रदान करता है.

Published date india.com Updated: January 21, 2025 10:37 AM IST
टैक्स सेविंग के लिए ELSS और NPS: लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न और छूट का सही संयोजन

मार्च के महीने में टैक्सपेयर कर बचाने के उपायों की तलाश करते हैं. इन उपायों में से कुछ ऐसे होते हैं जो रिटर्न और नकदी की उपलब्धता के मामले में बेहतर होते हैं. टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि आयकर की धारा 80C के तहत ‘इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम’ (ELSS) सबसे प्रभावी विकल्प है.

ELSS का लाभ

ELSS एक प्रकार की म्यूचुअल फंड योजना होती है जो शेयर बाजार से जुड़ी होती है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें केवल 3 साल की लॉक-इन अवधि होती है. इसका मतलब है कि तीन साल बाद निवेशक अपनी राशि निकाल सकते हैं. इसके अलावा, ELSS ने पिछले कई वर्षों में औसतन 11-12 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न दिया है. यह निवेशकों को अच्छा रिटर्न और टैक्स बचत दोनों ही प्रदान करता है.

एनपीएस का भी लाभ उठाएं

ELSS के अलावा, टैक्स एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि टैक्सपेयर को राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) का लाभ भी उठाना चाहिए. NPS में 50,000 रुपये का अतिरिक्त योगदान करने से टैक्स छूट मिलती है. यह योगदान टैक्सपेयर की कर योग्य आय को घटाता है. हालांकि, NPS में निवेश लंबी अवधि के लिए होता है और इसमें तरलता की कमी होती है, इसलिए इसे सोच-समझकर निवेश करें.

अन्य टैक्स सेविंग ऑप्शन

ELSS के अलावा आयकर की धारा 80C के तहत कुछ अन्य निवेश विकल्प भी उपलब्ध हैं जैसे PPF, सुकन्या समृद्धि योजना, एनएससी और LIC. इन योजनाओं पर ब्याज की दरें विभिन्न होती हैं. उदाहरण के तौर पर, PPF पर ब्याज 7.1 प्रतिशत है, जबकि एनएससी पर यह 7.7 प्रतिशत है. सुकन्या समृद्धि योजना का ब्याज 8.2 प्रतिशत होता है, जबकि LIC में यह 5-6 प्रतिशत के बीच होता है.

टैक्स सेविंग के लिए अन्य उपाय

शाह के मुताबिक, टैक्सपेयर को अपनी सभी कटौतियों का पूरा फायदा उठाना चाहिए. अगर कोई व्यक्ति पुरानी कर व्यवस्था चुनता है, तो उसे धारा 80C और 80D के तहत अधिकतम कटौती का लाभ मिल सकता है. इसके अलावा, हाल ही में पूंजी बाजार में आई गिरावट के कारण हुए नुकसान को भी टैक्सपेयर अपने रिटर्न में शामिल कर सकते हैं. इस नुकसान को अन्य पूंजीगत लाभ के खिलाफ सेट ऑफ करके टैक्स में छूट पा सकते हैं.

इस प्रकार, ELSS और NPS जैसे निवेश विकल्प टैक्स बचाने के साथ-साथ लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न देने में सक्षम हैं. टैक्सपेयर को इन योजनाओं का सही तरीके से चुनाव करना चाहिए ताकि वे कर लाभ के साथ-साथ भविष्य के लिए भी सुरक्षित वित्तीय योजना बना सकें.

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