मुंबई: रिजर्व बैंक ने वाणिज्यिक बैंकों को ऋण वितरण पर आरक्षित नकद अनुपात (सीआरआर) से छूट देने के अपने हाल के निर्णय पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह सुविधा खुदरा क्षेत्र की तीन श्रेणियों-आवास, वाहन और एमएसएमई- को दिये जाने वाले ऋण विस्तार पर ही लागू होगी. Also Read - एनपीए के लिए अस्थायी प्रावधानों का 100 फीसदी इस्तेमाल कर सकेंगे बैंक

बता दें कि कुछ बैंकों ने रिजर्व बैंक द्वारा बताई गई तीन खुदरा श्रेणियों के कर्ज में विस्तार की राशि को सीआरआर से मिलने वाली छूट की गणना को लेकर स्पष्टीकरण की मांग की थी. Also Read - RBI ने MSME के लिए दूसरे दौर के लोन के लिए की पुनर्गठन की घोषणा

रिजर्व बैंक ने खुदरा क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण को बढ़ाने के लिए 6 फरवरी पेश मौद्रिक समीक्षा में कहा था कि वाहन, आवास और एमएसएमई लोन में कर्ज की मूल राशि के ऊपर नया कर्ज दिया जाता है, तो इस पर बढ़ी राशि को सीआरआर से छूट देने की घोषणा की थी. Also Read - RBI Grade B Phase 2 Result 2021 Declared: RBI ने जारी किया ग्रेड B का रिजल्ट, इस Direct Link से करें चेक

इसका अर्थ यह हुआ कि कर्ज की राशि में इस तरह से हुई वृद्धि के एवज में बैंकों को सीआरआर के तौर पर चार प्रतिशत की अनिवार्य राशि अलग रखने की जरूरत नहीं होगी. बैंकों को अपनी कुल जमा राशि में चार प्रतिशत राशि सीआरआर के तौर पर रिजर्व बैंक में रखनी होती है. इस राशि पर उन्हें कोई ब्याज नहीं मिलता है.

रिजर्व बैंक ने छह फरवरी की घोषणा के बाद 10 फरवरी को साफ किया कि सीआरआर से यह छूट या तो ऋण की शुरुआत से पांच साल तक या ऋण की परिपक्वता अवधि तक मिलेगी. यदि ऋण की परिपक्वता अवधि पांच साल से अधिक हुई तो यह छूट पांच साल के लिए ही मान्य होगी.