Fact check: सोशल मीडिया पर मैसेज के जरिेए ये दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के DA की कटौती का आदेश वापस ले लिया है. इस तरह के वायरल दावे के साथ एक आदेश की कॉपी भी वायरल हो रही है, इस आदेश को  21 सितंबर का बताया जा रहा है. लेकिन हम बता दें कि ये वायरल मैसेज सही नहीं है और केंद्र सरकार ने ऐसा कोई आदेश अबतक जारी नहीं किया है. Also Read - भाजपा ने जम्मू-कश्मीर की सभी पार्टियों को एक मंच पर ला दिया, हम अनुच्छेद 370 को वापस लाएंगे: सज्जाद लोन

दरअसल, कोविड-19 के संक्रमण को लेकर जारी किए गए लॉकडाउन के कारण आई आर्थिक सुस्ती को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की तीन अतिरिक्त किश्तों पर रोक लगाने का फैसला लिया था. केंद्र सरकार के इस फैसले का असर 50 लाख कर्मचारियों और 61 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ा है, अब दावा किया जा रहा है कि ये आदेश वापस ले लिया गया है. जानिए क्या है दावे की सच्चाई…. Also Read - महिलाओं के बैंक खातों में केंद्र सरकार जमा कर रही है 2.20 लाख रुपये? जानिए सच्चाई

इस दावे की जब तहकीकात की गई तो पता चला कि इंटरनेट पर चल रही ऐसी खबरों में ऐसी कोई सच्चाई नहं जिससे पुष्टि होती हो कि केंद्र सरकार ने DA कटौती का आदेश वापस ले लिया है. वायरल हो रही चिट्‌ठी को पढ़ने से स्पष्ट होता है कि ये DA कटौती वापस लेने का आदेश नहीं है, बल्कि, केंद्र सरकार में जनरल सेक्रेटरी डॉ. एम रघवैय्या द्वारा लिखा गया एक आवेदन पत्र है, जो कि वित्त मंत्री को लिखा गया है.

इस पत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से अनुरोध किया गया है कि वे केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स को डियरनेस अलाउंस ( DA) का लाभ देने के लिए उचित कदम उठाएं. इसी आवेदन को वित्त मंत्रालय का आदेश बताकर गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई की खबर के अनुसार, डॉ. एम रघवैय्या नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन के जनरल सेक्रेटरी हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों की DA कटौती वापस लेने का अनुरोध किया था. केंद्र सरकार के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पीआईबी फैक्ट चेक ने भी DA कटौती वापस लिए जाने वाले दावे को फेक बताया है. अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पीआईबी फैक्ट चेक ने भी DA कटौती वापस लिए जाने वाले दावे को फेक बताया है.