नई दिल्ली: उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा कि रुपए में और गिरावट नहीं हो यह सुनिश्चित करने के लिए रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय को मिलकर काम करना चाहिए. एसोचैम ने रविवार को कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपए के मूल्य में और गिरावट से देश को आयात से उपजी मुद्रास्फीति का सामना करना पड़ सकता है. एसोचैम के महासचिव डी. एस. रावत ने कहा, ”हमें मालूम है कि रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय को वृहद आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उथल – पुथल के हर मौके पर साथ काम करना चाहिए.”

(एसोचैम के महासचिव डी. एस. रावत)

(एसोचैम के महासचिव डी. एस. रावत)

उथल – पुथल के समय जरूर हस्तक्षेप हो
एसोचैम के महासचिव रावत ने कहा कि रिजर्व बैंक अभी विदेशी मुद्रा विनिमय दरों को बाजार के ऊपर छोड़ा हुआ है. उसे ईरान परमाणु समझौते पर अमेरिकी रुख, ओपेक देशों द्वारा कच्चा तेल के उत्पादन में पर्याप्त से कम वृद्धि और उभरते वित्तीय बाजारों पर दबाव जैसे भू- राजनीतिक कारकों द्वारा होने वाली अनिश्चितता और उथल – पुथल के समय जरूर हस्तक्षेप करना चाहिए.

आरबीआई-सेबी और वित्तमंत्रालय उठाएं ये कदम
एसोचैम के महासचिव रावत ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को सहज स्थिति देने के लिए सेबी, रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय को द्वितीयक ऋण व शेयर बाजारों में निवेश के नियमों का सरलीकरण करना चाहिए.

सर्वकालिक निम्न स्तर से उबरा रुपया
रुपये के कल कारोबार के दौरान सर्वकालिक न्यूनतम स्तर तक लुढ़कने के बाद बीते 29 मई इसकी विनिमय दर में अच्छा सुधार दर्ज किया गया और रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 33 पैसों की तेजी के साथ 68.46 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. बाजार सूत्रों के अनुसार आज भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से डॉलर की बिकवाली बढ़ी थी, जिससे एक समय रुपया 68.35 तक मजबूत हो गया था. विगत चार सत्रों में रुपए में यह पहली तेजी रही. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अर्थव्यवस्था के स्तर पर चुनौतियों के कारण विदेशी विनिमय बाजार में सतर्कता का माहौल है. (इनपुट-एजेंसी)