विदेशी निवेशकों का दबदबा: 2024 में रियल एस्टेट में 3.7 बिलियन डॉलर किए निवेश

2024 में भारतीय रियल एस्टेट में विदेशी निवेशकों ने 54% हिस्सेदारी के साथ 3.7 बिलियन डॉलर का निवेश किया. को-इंवेस्टमेंट और इंडस्ट्रियल सेगमेंट में वृद्धि हुई, जबकि घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई.

Published date india.com Published: January 15, 2025 1:49 PM IST
विदेशी निवेशकों का दबदबा: 2024 में रियल एस्टेट में 3.7 बिलियन डॉलर किए निवेश

2024 में भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश में विदेशी निवेशकों का दबदबा कायम रहा. 54% हिस्सेदारी के साथ इनका कुल निवेश 3.7 बिलियन डॉलर तक पहुंचा. वेस्टियन रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटी है, लेकिन मूल्य के लिहाज से इसमें 36% की वृद्धि हुई.

घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी घटी

घरेलू निवेशकों ने भी इसी ट्रेंड को अपनाया. 2023 में 35% हिस्सेदारी रखने वाले घरेलू निवेशकों का योगदान 2024 में घटकर 30% रह गया. हालांकि, मूल्य के मामले में 36% की वृद्धि दर्ज की गई.

को-इंवेस्टमेंट का बढ़ता ट्रेंड

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में को-इंवेस्टमेंट में भारी उछाल देखने को मिला. विदेशी निवेशकों ने घरेलू विशेषज्ञता पर भरोसा जताते हुए 16% हिस्सेदारी निभाई. इस सेगमेंट में 61 गुना की अभूतपूर्व वृद्धि हुई.

संस्थागत निवेश में जबरदस्त बढ़ोतरी

2024 में भारत में रियल एस्टेट में कुल संस्थागत निवेश 6.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले साल की तुलना में 61% अधिक है.

कमर्शियल और रेजिडेंशियल एसेट्स का दबदबा

कमर्शियल एसेट्स 35% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर रहे. दूसरी ओर, रेजिडेंशियल सेक्टर ने 2 बिलियन डॉलर के निवेश के साथ 30% योगदान दिया. इस सेक्टर में 171% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई.

इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग में रिकॉर्ड वृद्धि

इंडस्ट्रियल और वेयरहाउसिंग सेगमेंट में भी जोरदार उछाल देखा गया. 2023 में 15% हिस्सेदारी वाले इस सेक्टर का योगदान 2024 में बढ़कर 28% हो गया. इसमें 203% की सालाना वृद्धि हुई.

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भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदें

वेस्टियन के सीईओ श्रीनिवास राव ने कहा, “2024 में रियल एस्टेट ने महामारी से पहले के स्तर को पार कर लिया है. लेकिन 2025 में वैश्विक मंदी, मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनाव के कारण चुनौतियां बढ़ सकती हैं.”

उन्होंने उम्मीद जताई कि 2025 में आरबीआई रेपो दर कम करेगा, जिससे रियल एस्टेट गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. किफायती मॉरगेज रेट से निवेशकों का रुझान बढ़ सकता है.

सरकारी नीतियों से मिलेगा समर्थन

रिटर्न-टू-ऑफिस पॉलिसी, उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाएं, और किफायती आवास पर फोकस जैसी सरकारी पहलों से रियल एस्टेट की मांग में वृद्धि की उम्मीद है. इससे निवेशकों का विश्वास और भागीदारी बढ़ सकती है.

गौरतलब है कि 2024 में विदेशी निवेशकों और को-इंवेस्टमेंट की भूमिका ने रियल एस्टेट में नए आयाम स्थापित किए. आने वाले समय में सरकारी नीतियां और आरबीआई की पहल इस क्षेत्र को और मजबूती देंगी.

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