नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार एक सितंबर से नई कारों और बाइक्स के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य हो जाएगा. इससे इसके बाद अगले महीने से नई कार और मोटरसाइकिल खरीदना महंगा हो सकता है. नए नियमों के तहत कार मालिकों को तीन साल वहीं बाइक वालों को 5 साल तक के लिए बीमा खरीदना होगा. आमतौर पर लोग एक साल तक के लिए गाड़ियों का इंश्योरेंस कराते हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने मोटर बीमा में काम कर रहे सामान्य बीमा कंपनियों को निर्देश जारी किया है. Also Read - भूकंप, बाढ़, तोड़फोड़, दंगे से होने वाले नुकसान के लिए भी वाहनों का हो सकेगा बीमा

मोटर वाहन अधिनियम के मुताबिक सभी वाहनों का थर्ड पार्टी वाहन बीमा अनिवार्य है. हर पॉलिसी में दो हिस्‍से होते हैं-थर्ड पार्टी कवर व ऑन डैमेज. देश में सभी वाहनों के लिए थर्ड पार्टी कवर अनिवार्य है. यह वाहन से किसी थर्ड पार्टी को नुकसान की भरपाई करता है. यह ऑनर के वाहन को पहुंची क्षति को कवर नहीं करता. थर्ड पार्टी इंश्‍योरेंस कवर का प्रीमियम प्रत्‍येक वर्ष IRDA तय करता है. Also Read - फेस्टिव सीजन में 11 प्रतिशत कम हो गई वाहनों की बिक्री, पैसेंजर और टू व्‍हीलर सेगमेंट में सुस्‍ती

1500 सीसी से ज्यादा की नर्इ कार के लिए शुरुआती इंश्योरेंस कवर कम से कम 24,305 रुपये पड़ेगा. यह फिलहाल 7,890 रुपये में मिलता है. वहीं, 350 सीसी इंजन से ज्यादा की बाइक के लिए खरीदार को 13,024 रुपये देने होंगे. आपको फिलहाल 2,323 रुपये देने पड़ते हैं. इंश्योरेंस प्रीमियम अलग-अलग मॉडल में अलग-अलग हो सकते हैं. Also Read - दिल्ली के 68 लाख बाइक वालों को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने ऑड- इवन योजना से दी छूट

मुआवजा दिलाने के लिए थर्ड पार्टी बीमा जरूरी
एक केस की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि देश में हर साल सड़क हादसों में एक लाख से अधिक लोगों की जान जाती है. ऐसे में पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाने के लिए थर्ड पार्टी बीमा जरूरी है. देश की सड़कों पर चल रहे 18 करोड़ वाहनों में सिर्फ छह करोड़ के पास ही थर्ड पार्टी बीमा है. सड़क हादसों के पीड़ितों या मृतकों को मुआवजा नहीं मिल रहा है क्योंकि वाहनों का थर्ड पार्टी कवर नहीं है.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान जब बीमा कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर ऐतराज जताया तो सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी को फटकार लगते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना में लोग मर रहे है. हर तीन मिनट में एक दुर्घटना होती है. अदालत ने टिप्पणी की, ‘आप उनको देखिए, वो सड़क दुर्घटना में मर रहे है. भारत की जनता मर रही है. उनके लिए और बेहतर करिए.’ एक साल में बीमा कराकर अगले साल बीमा नहीं कराने वाले वाहनों की संख्या 66 फीसद से ज्यादा है. रोड सेफ्टी पर बनी सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ने देश के इंश्‍योरेंस रेग्‍युलेटरी एवं डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (इरडा) से कहा था कि वे बीमा कंपनियों को व्‍हीकल्‍स की सेल के समय ही एक अनिवार्य लॉन्‍ग टर्म इंश्‍योरेंस पॉलिसी ऑफर करें.