नई दिल्लीः सरकार ने विभन्न उद्योगों में नव नियुक्त श्रमिकों के भविष्य निधि कोष में नियोक्ता के हिस्से का पूरा योगदान तीन साल तक खुद करने की योजना को मंजूरी दे दी है. यह योगदान मूल वेतन का 12 प्रतिशत होगा और उम्मीद है कि इससे एक करोड़ नौकरियां सृजित करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी. Also Read - दशहरे में मोदी सरकार से लेकर, बिहार चुनाव और कंगना रनौत पर जमकर बरसे उद्वठ ठाकरे, कही ये बड़ी बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इसके तहत उद्योगों में नये भर्ती किए गए श्रमिकों के भविष्य निधि कोष में नियोक्ताओं द्वारा किए जाने वाले पूरे 12 प्रतिशत अंशदान का बोझ शुरुआती तीन साल तक सरकार उठाएगी. उम्मीद है कि इससे नियोक्ता नई भर्तियों के लिए प्रोत्साहित होंगे. Also Read - PM Kisan Samman Yojana Update: 6000 रुपये की आर्थिक मदद के लिए पीएम किसान योजना मे ये लोग नहीं कर सकते अप्लाई, जानें योजना के नियम

पहले 8.33 फीसदी ही अंशदान करती थी सरकार
श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने इस निर्णय की जानतकारी देते हुए संवाददाताओं से कहा, ‘हमारी सरकार रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए प्रतिबद्ध है. 2016 में लागू की गई योजना के तहत पेंशन मद में नियोक्ताओं की तरफ से किए जाने वाले 8.33 प्रतिशत राशि का भुगतान सरकार करती है. हमने योजना को विस्तृत किया है. यह निर्णय लिया गया है कि परिधान, वस्त्र एवं कपड़ा क्षेत्र में पूरे 12 प्रतिशत अंशदान का वहन सरकार करेगी.’ Also Read - Onion price: प्याज की कीमतों पर जल्द लगेगी लगाम! मोदी सरकार ने उठाया यह बड़ा कदम

उन्होंने कहा कि अगस्त 2016 में शुरुआत के बाद प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना से पहले ही 30 लाख कामगार लाभान्वित हो चुके हैं. गंगवार ने कहा, ‘हमें लगता है कि सरकार के निर्णय से एक करोड़ नौकरियां सृजित करने में मदद मिलेगी. हम इस योजना के लिए बजट प्रावधान को बढ़ाकर 6,500-10,000 करोड़ रुपये तक करेंगे.’ इस योजना के तहत वैसे कर्मचारी आते हैं जिन्होंने एक अप्रैल 2016 के बाद रोजगार पाया है और उनका वेतन 15 हजार रुपये प्रति महीने तक है.

दो साल से लगातार घट रहा रोजगार
गौरतलब है कि देश में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर मोदी सरकार विपक्ष के निशाने पर है. आरबीआई से जुड़े शोध प्रोजेक्ट केएलईएमएस इंडिया के अनुसार वर्ष 2014 से 2016 के बीच रोजगार में कमी आई थी. इसके बाद नवंबर 2016 में नोटबंदी और पिछले साल जीएसटी लागू होने के बाद से रोजगार के अवसर और घटने की आशंका व्यक्त की जा रही है.

(इनपुट- पीटीआई)