GST: पेट्रोल और डीजल की कीमतें अनियंत्रित होने के कारण हर रोज तंल कंपनियों द्वारा तय की जाती हैं. इससे तेल बहुत ज्यादा महंगा हो गया. जिसका महंगाई बढ़ाने में खासा योगदान रहता है. इसको लेकर कई बार जीएसटी के दायरे में लाने के लिए देश भर से मांग भी उठती रही है. लेकिन केंद्र सरकार से पहले प्राकृतिक गैस एवं विमान ईधन (एटीएफ) को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार कर सकती है. इस बात की संभावना इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि राज्यों के साथ जीएसटी क्षतिपूर्ति का मसला सुलझने के बाद सरकार जीएसटी की व्यवस्था में व्यापक बदलाव की तैयारी कर रही है. Also Read - Crude oil price today: तीन महीने की ऊंचाई पर पहुंचा कच्चा तेल, कोरोना वैक्सीन के जल्द आने की उम्मीद से बढ़ रहे हैं भाव

सूत्रों का कहना है कि सरकार जीएसटी के दूसरे चरण में दरों को कम और जीएसटी से छूट वाली वस्तुओं को सीमित रखना चाहती है. जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठकों में दरों में बदलाव के साथ-साथ कम से कम दो पेट्रोलियम उत्पादों (प्राकृतिक गैस एवं एटीएफ) को इसके दायरे में लाने पर भी चर्चा हो सकती है. फिलहाल, पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का फैसला जून, 2022 तक के लिए टाला जा सकता है. Also Read - Crude Oil Price: कोरोना वैक्सीन की अच्छी खबर से कच्चे तेल के भावों में बढ़त कायम

सूत्रों का कहना है कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय पहले ही इन पेट्रो उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की सिफारिश कर चुका है. आगामी बैठकों में वित्त मंत्रालय इस पर विचार कर सकता है. जीएसटी की व्यवस्था में क्रूड, पेट्रोल, डीजल, एटीएफ और प्राकृतिक गैस को इसके दायरे से बाहर रखा गया है. Also Read - अब अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार रखेगा भारत, दोनों देशों के बीच बनी आपसी सहमति

वहीं रसोई गैस, केरोसिन और नेफ्था को जीएसटी के दायरे में रखा गया है. इस कारण से कंपनियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. जीएसटी काउंसिल के एक सदस्य ने हाल में कहा था कि पेट्रो उत्पादों को जीएसटी के दायरे से हमेशा बाहर नहीं रखा जाएगा, लेकिन इसमें समय लग सकता है.

कम से कम कोरोना महामारी के कारण राजस्व संग्रह पर पड़े असर की भरपाई तक इंतजार करना होगा. फिलहाल अक्टूबर में जीएसटी संग्रह फिर एक लाख करोड़ रुपये के पार रहा है. इससे पेट्रो उत्पादों को चरणबद्ध तरीके से इसके दायरे में लाने के लिए राज्यों को सहमत करने में मदद मिल सकती है.

(With IANS Input)