नई दिल्ली : अर्थव्यवस्था की सेहत का सबसे मजबूत पैमाना समझा जाने वाला सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का ताजा आंकड़ा निराशाजनक रहा है. वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर की अवधि में जीडीपी दर में तेज गिरावट दर्ज की गई है. इस अवधि में जीडीपी दर 7.1 प्रतिशत रही है. इससे पिछली तिमाही में यह 8.2 फीसदी पर थी. Also Read - IMD Predicts Normal Monsoon: कोरोना संकट के बीच अच्छी खबर, इस साल भी जमकर बसरेंगे बादल

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इस गिरावट की बड़ी वजह डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और ग्रामीण मांग में कमी आना है. वित्तवर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में गिरावट के बावजूद जीडीपी की वृद्धि दर पिछले वित्तवर्ष यानी 2017-18 की समान तिमाही की तुलना में अधिक रही है. वित्तवर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 6.3 फीसदी रही थी. Also Read - One Year of Lockdown in India: कोराना काल का एक साल : उद्योग-धंधे रहे बेहाल, MSME का हो गया बुरा हाल

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केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) दर जुलाई-सितंबर तिमाही में बढ़कर 6.9 फीसदी रही, जोकि पिछली तिमाही की 8 फीसदी की तुलना में कम है. वित्तवर्ष 2017-18 की दूसरी तिमाही में जीवीए की दर 6.1 फीसदी रही थी.

बुनियादी क्षेत्र के उद्योगों में भी सुस्ती

कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस तथा उर्वरक के उत्पादन में कमी से आठ बुनियादी क्षेत्र के उद्योगों की वृद्धि दर अक्टूबर में कुछ धीमी पड़कर 4.8 प्रतिशत रही. आठ बुनियादी क्षेत्रों- कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली क्षेत्र की वृद्धि दर एक साल पहले अक्टूबर में 5 प्रतिशत रही थी. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़े के अनुसार अक्टूबर महीने में उर्वरक उत्पादन में 11.5 प्रतिशत, कच्चा तेल में 5 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में 0.9 प्रतिशत की कमी आई.

दूसरी तरफ कोयला, सीमेंट तथा बिजली उत्पादन में वृद्धि हुई. चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-अक्टूबर के दौरान आठ बुनियादी उद्योगों की औसत वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही, जो पिछले साल इसी अवधि में 3.5 प्रतिशत थी. (इनपुट एजेंसियों से)