Sovereign Gold Bonds (SGB): सरकार द्वार संचालित Sovereign Gold Bond (SGB) का दूसरा हिस्सा आज सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध हो रहा है. इस वित्तीय वर्ष में यह दूसरी बार ओपन हो रहा है. इसका 15 मई को सब्सक्रिप्शन बंद हो जाएगा. इस गोल्ड बॉन्ड स्कीम का ईश्यू प्राइस 4590 रुपये प्रति ग्राम तय किया गया है. इसका ईश्यू डेट 19 मई है. जो लोग इस स्कीम के लिए ऑनलाइन आवेदन करेंगे और डिजिटल मोड में पेमेंट करेंगे उन्हें 50 रुपये प्रति ग्राम की छूट मिलेगी. ऐसे निवेशकों के लिए ईश्यू प्राइस प्रति ग्राम 4540 रुपये है. केंद्र सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) Sovereign Gold Bonds जारी कर रहा है. Also Read - RBI Governor Economic Package: RBI गवर्नर ने की अहम घोषणाएं, जानें आपको क्या मिला...

Sovereign Gold Bond (SGB) क्या है…

SGB सरकारी प्रतिभूतियां हैं जिन्हें ग्राम में denominate किया गया है. यह भौतिक रूप से सोना नहीं रखने का विकल्प देता है. निवेशकों को इश्यू प्राइस का भुगतान करना होगा और बदले में मिले बॉन्ड को maturity के बाद भुनाया जा सकेगा. इस बॉन्ड को सरकार की ओर से RBI जारी कर रहा है. Also Read - RBI Governor Shaktikant Das Speech: लॉकडाउन में चली रेपो रेट पर कैंची, क्या कम होगी EMI?

भौतिक रूप से सोना खरीदने की बजाय SGB में निवेश क्यों करना चाहिए?

आम निवेशकों के लिेए यह एक अच्छा सवाल है. दरअसल, निवेश के उद्देश्य से भौतिक रूप से सोना खरीदने में कई जोखिम होते हैं. सबसे बड़ा जोखिम उसकी सुरक्षा होती है. दूसरा जोखिम उसकी गुणवत्ता होती है. लेकिन SGB में निवेश में ऐसी कोई दिक्कत नहीं है. भौतिक रूप से खरीदे गए सोने को इन कैश कराना भी SGB की तुलना में झंझट वाला होता है. इस तरह एक निवेशक के रूप में भौतिक रूप से सोने को रखने में आने वाले खर्च और सुरक्षा की समस्या SGB में नहीं आती. दूसरी तरफ आप आश्वस्त रहते हैं कि Maturity पर जब आप इस बॉन्ड को इनकैश कराएंगे तो आपको बाजार मूल्य के साथ ब्याज भी मिलेगा. Also Read - RBI Governor Economic Package: आर्थिक पैकेज को लेकर RBI गवर्नर ने की अहम घोषणाएं , ब्याज दरें कम कीं

ज्वेलरी के बजाय SDB में निवेश क्यों लाभदायक

दरअसल, जब हम ज्वेलरी खरीदते हैं तो हमारा मुख्य उद्देश्य निवेश नहीं बल्कि आभूषण की खूबसूरती और उसका इस्तेमाल होता है. ऐसे में इसके लिए हमें कई तरह अन्य चार्ज देने पड़ते हैं. ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज लगता है और 24 कैरट सोना में ज्वेलरी बनती भी नहीं है. ऐसे में जब आप इनको बेचने जाते हैं तो आपको मेकिंग चार्ज का नुकसान उठाने के साथ खरीददार सोने की गुणवत्ता को हमेशा कमतर बताता है. ऐसे में आपको नुकसान होगा. वहीं दूसरी ओर SDB में ऐसी कोई समस्या नहीं आएगी. इसलिए हम हमेशा कहते हैं कि निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदना चाहते हैं तो गोल्ड बॉन्ड एक अच्छा विकल्प है.

क्या SDB में निवेश जोखिम पूर्ण है?

देखिए… निवेश शब्द के साथ जोखिम का आना स्वाभाविक है. दुनिया में ऐसा कोई निवेश नहीं हो सकता जिसमें सैद्धांतिक रूप से शून्य जोखिम हो. ऐसे में गोल्ड बॉन्ड के साथ भी कुछ ऐसा ही है. अगर गोल्ड मूल्य गिर जाए तो निश्चित तौर
पर आपको नुकसान होगा. लेकिन गोल्ड ऐसी कॉमोडिटी है, जिस पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जाता है. अन्य निवेश की तुलना में इसकी कीमत काफी हद तक स्थिर रहती है या फिर मामूली उतार-चढ़ाव होता है. लेकिन SDB की सबसे अच्छी चीज यह है कि आप जितना सोना खरीदेंगे उसकी क्वानटिटी में कभी कमी नहीं आएगी.

कौन निवेश कर सकता है?

Foreign Exchange Management Act, 1999 के तहत भारत का नागरिक कहलाने वाला कोई भी व्यक्ति इस बॉन्ड में निवेश कर सकता है. इसमें व्यक्तिगत के साथ हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली, ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी और चेरिटेबल इंस्टीट्यूशन भी निवेश कर सकते हैं. इसमें ज्वाइंट होल्डिंग की भी अनुमति है. एक नाबालिग भी निवेशक बन सकता है, लेकिन इसके लिए उसके गार्जियन को आवेदन करना होगा.

कुछ अन्य बातें..

– अप्रैल में सरकार ने SGB के पहले हिस्से को जारी किया था. अब दूसरा हिस्सा ऐसे समय में आ रहा है जब सोना में निवेश आकर्षक बन गया है.
– दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड एक्सचेंज ट्रेड फंड SPDR ETF में गोल्ड का भंडार संभवतः अब तक के सबसे उच्च स्तर 1075.8 टन तक पहुंच गया है.
– अप्रैल में MCX में गोल्ड का फ्यूचर प्राइस 47000 रुपये प्रति ग्राम को पार कर गया था. पिछले एक साल में सोने की कीमत में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.