राष्ट्रीय फैमिली हेल्थ द्वारा जारी किए गए सर्वे में यह जानकारी सामने आई है कि बच्चों में कुपोषण के मामले बढ़ रहे हैं. जिसको लेकर केंद्र सरकार कैबिनेट के सामने 4, 000 करोड़ रुपये का एक प्रस्ताव पेश करने वाली है. मिड डे मील की तरह अब स्कूली बच्चों को पोषक तत्व से भरपूर नाश्ता देने की भी योजना बनाई जा रही है.Also Read - शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया छह पैसे मजबूत, कच्चे तेल में तेजी से मजबूती रही सीमित

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मिड-डे मील के साथ सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों को नाश्ता मुफ्त मुहैया कराने का प्रावधान रखने का भी प्रस्ताव है. Also Read - भारतीय संघर्ष कर रहे हैं और प्रधानमंत्री उनका ध्यान भटकाने में व्यस्त, राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

इस योजना के तहत स्कूली बच्चों को स्कूल पहुंचते ही पोषक तत्वों से भरपूर कोई तैयार नाश्ता दिया जाएगा, लेकिन इनमें ब्रांडेड कंपनियों से बनी सामग्री या बिस्कुट जैसी कोई चीज नहीं शामिल किया जाएगा. इसकी जगह स्वयंसेवी संस्थानों और महिला समूहों द्वारा तैयार सामग्री मुहैया कराने पर विचार किया जा रहा है. Also Read - आयकर विभाग ने नये टीडीएस प्रावधान को लेकर दिशानिर्देश जारी किया

केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने फिलहाल जो रोडमैप तैयार किया है, उनमें इस योजना को सभी राज्यों में लागू किया जाना है. नाश्ता योजना पर साल में करीब दस हजार करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं. इसमें केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा शामिल है.

राज्य सरकारों से कई दौर की चर्चा के बाद केंद्र इस पूरी योजना को तेजी से आगे बढ़ाने में जुटा हुआ है.

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इसे मंजूरी के लिए जल्द ही कैबिनेट के सामने रखा जा सकता है. एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में भी इसका एलान किया जा सकता है.

शिक्षा नीति में कहा गया है कि जब बच्चे कुपोषित या अस्वस्थ होते हैं तो वे बेहतर रूप से सीखने में असमर्थ होते हैं. इस हिसाब से बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य (मानसिक स्वास्थ्य सहित) पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है.”

पोषक भोजन और अच्छी तरह से प्रशिक्षित सामाजिक कार्यकर्ताओं, काउंसिलर, और स्कूली शिक्षा प्रणाली में समुदाय की समुचित भागीदारी के साथ-साथ शिक्षा प्रणाली के अलावा विभिन्न सतत उपायों के माध्यम से काम किया जाएगा.

इस योजना को एक साथ पूरे देश भर में लागू करने के बजाय इसे पहले देश के उन जिलों में शुरू करने की तैयारी है, जहां कुपोषण की समस्या सबसे ज्यादा है.