पणजी: सरकार ने आर्थिक वृद्धि दर को गति देने के लिए बड़ी घोषणा करते हुए शुक्रवार को कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर घटा दी. अब घरेलू कंपनियों के लिए सभी अधिशेषों और उपकर समेत कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर 25.17 प्रतिशत होगी. वित्त मंत्री शुक्रवार को निर्मला सीतारमण ने कहा कि नई दर इस वित्त वर्ष के एक अप्रैल से प्रभावी होगी.वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि दर कम करने और अन्य घोषणाओं से राजस्व में सालाना 1.45 लाख करोड़ रुपए की कमी का अनुमान है.

वित्त मंत्री की इन घोषणाओं से शेयर बाजार की बांछे खिल गईं. बीएसई का संवेदी सूचकांक सेंसेक्‍स 1921 अंक उछलकर 38014.62 पर बंद हुआ जबकि  निफ्टी 569 अंक चढ़कर 11274.20 पर बंद  हुआ.

सीतारमण ने कहा कि निवेश और आर्थिक वृद्धि दर को गति देने के लिए ये कदम उठाए गए हैं. सीतारमण ने कर में छूट से मेक इन इंडिया में निवेश आने और रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने का भरोसा जाहिर किया. उन्होंने कहा कि इससे अधिक राजस्व प्राप्त होगा.

– यदि कोई घरेलू कंपनी किसी भी प्रोत्साहन का लाभ नहीं लें तो उनके लिए कॉरपोरेट कर की दर 22 प्रतिशत होगी.
– आयकर अधिनियम तथा वित्त अधिनियम में किए गए बदलाव अध्यादेश के जरिए अमल में लाये जाएंगे.
– 22 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान करने का विकल्प चुनने वाली कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर देने की जरूरत नहीं होगी.
– एक अक्टूबर के बाद बनने वाली घरेलू विनिर्माण कंपनियां बिना किसी प्रोत्साहन के 15 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान कर सकेंगी
– इनके लिए अधिशेषों और उपकर समेत कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर 17.01 प्रतिशत होगी.
– छूट का लाभ उठा रही कंपनियां इनकी अवधि समाप्त होने के बाद कम दर पर कर का भुगतान करने का विकल्प चुन सकती हैं.

सरकार ने प्रतिभूति लेन-देन कर की देनदारी वाली कंपनियों के शेयरों की बिक्री से हुए पूंजीगत लाभ पर बजट में प्रस्तावित उपकर को भी वापस लेने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए डेरिवेटिव समेत प्रतिभूतियों की बिक्री से होने वाले पूंजीगत लाभ पर धनाढ्य-उपकर समाप्त करने का भी निर्णय लिया गया है.

– कंपनियों एक अन्य राहत दी गई है, जिन सूचीबद्ध कंपनियों ने पांच जुलाई से पहले शेयरों की पुनर्खरीद की घोषणा की है, उन्हें भी धनाढ्य-उपकर नहीं देना होगा.

– कंपनियों को अब दो प्रतिशत कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) इनक्यूबेशन, आईआईटी, एनआईटी और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं पर खर्च करने की भी छूट दी गई है.