नई दिल्ली। आर्थिक मोर्चे पर एनडीए सरकार के लिए राहत भरी खबर आने वाली है. वित्तीय सेवाएं देने वाली वैश्विक संस्था मॉर्गन स्टेनली ने एक रिपोर्ट में यह कहा है कि देश की आर्थिक वृद्धि में तेजी आने की उम्मीद है और दिसंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर सात प्रतिशत रह सकती है. चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत और पहली तिमाही में 5.7 प्रतिशत रही थी. जीडीपी में गिरावट के लिए नोटबंदी और जीएसटी को जिम्मेदार माना गया था. इसे लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर रहा है. Also Read - इस साल तो नहीं लेकिन 2021 में अपने पूरे रफ्तार में रहेगी देश की अर्थव्यवस्था: आईएमएफ

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रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्योग और सेवा क्षेत्र में वृद्धि दर तेज होने और कृषि क्षेत्र में घटने का अनुमान है. मॉर्गन स्टेनली ने कहा, हमारा अनुमान है कि आर्थिक सुधार को बढ़ावा मिला है और दिसंबर तिमाही में सालाना आधार पर जीडीपी वृद्धि दर सात प्रतिशत रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के संदर्भ में वृद्धि दर सालाना आधार पर दूसरी तिमाही के 6.1 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर तीसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत रही है. Also Read - पीएम नरेंद्र मोदी पर कपिल सिब्बल का तंज, अर्थव्यवस्था को लेकर सुनाई खरी-खोटी

जीडीपी की वृद्धि दर में सुधार, दूसरी तिमाही में 5.7 फीसदी से बढ़कर 6.3 फीसदी पर पहुंचा

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों की आय में भी दिसंबर तिमाही के दौरान सुधार हुआ है. वाहन और दोपहिया वाहनों की बिक्री भी इस दौरान तेजी से बढ़ी है. वस्तुओं के निर्यात की वृद्धि में भी दहाई अंकों में वृद्धि दर्ज की गई है.

5.7 फीसदी पहुंच गई थी जीडीपी 

मोदी सरकार के तमाम दावों के बीच साल 2017 की शुरुआत में भारतीय अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा था. अप्रैल से जून 2017 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में भारी गिरावट आई थी. इस दौरान जीडीपी घटकर 5.7 फीसदी तक पहुंच गई. इससे पिछले तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6.1 फीसदी थी. यह इसका तीन साल का निचला स्तर था.

विनिर्माण गतिविधियों में सुस्ती के बीच लगातार तीसरी तिमाही में नोटबंदी का असर दिखाई दिया. इससे पिछली तिमाही (जनवरी से मार्च) में जीडीपी की वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रही थी. 2016-17 की पहली तिमाही की संशोधित वृद्धि दर 7.9 फीसदी थी. केंद्र सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जून के बीच पहली तिमाही में विकास दर धीमी रही. इस दौरान ये 5.7 फीसदी पर सिमट गई. पिछली तिमाही में जीडीपी 6.1 फीसदी थी. इसके लिए नोटबंदी को ही जिम्मेदार माना गया था.