नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल ने आज 29 सामानों और 53 सेवाओं पर टैक्स दर में बदलाव को हरी झंडी दे दी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने काउंसिल की बैठक के बाद ये जानकारी दी. उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों में बदलाव 25 जनवरी से लागू हो जाएगा. अरुण जेटली ने बताया कि काउंसिल की ओर से 53 श्रेणियों में आने वाली सेवाओं पर भी जीएसटी दर को कम किया गया है. जेटली ने ये भी कहा कि आज की मीटिंग में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर चर्चा नहीं हुई, लेकिन अगली मीटिंग में इस पर चर्चा होगी. Also Read - फिरोजशाह कोटला स्‍टेडियम के स्‍टैंड से नाम हटवाना चाहते हैं Bishan Singh Bedi, डीडीसीए सदस्‍यता भी छोड़ी

उन्होंने कहा कि जीएसटी परिषद की अगली बैठक में जीएसटी रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को सरल करने की मंजूरी दी जाएगी. बैठक में टैक्स फाइल प्रक्रिया के सरलीकरण पर भी चर्चा हुई. इस बारे में नंदन नीलकेणी ने एक विस्तृत प्रजेंटेशन दिया.

बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में जेटली ने कहा कि परिषद की अगली बैठक में कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, पेट्रोल, डीजल, विमान ईंधन एटीएफ और रीयल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने पर विचार किया जा सकता है. अनुपालन के बोझ को कम करने के लिए परिषद ने इस विचार पर चर्चा की कि पंजीकृत इकाइयां जीएसटीआर 3 बी फॉर्म में जीएसटी रिटर्न दाखिल करना जारी रखें. वहीं इसके साथ ऐसी प्रणाली की ओर बढ़ा जाए जिसमें आपूर्तिकर्ता के इन्वॉयस मे लेनदेन का ब्योरा आ जाए.

जेटली ने कहा कि इस बारे में राज्यों को लिखित में जानकारी भेजने के बाद नई प्रक्रिया को जीएसटी परिषद की अगली बैठक में अंतिम रूप दिया जा सकता है. जीएसटी परिषद की अगली बैठक की तारीख अभी तय नहीं की गई है. वित्त मंत्री ने बताया कि ट्रांसपोर्टरों को राज्यों के बीच 50,000 रुपये से अधिक मूल्य के सामान या माल की आपूर्ति के लिए अपने साथ इलेक्ट्रानिक वे बिल या ई-वे बिल रखना होगा। यह व्यवस्था एक फरवरी से क्रियान्वित की जा रही है। इससे कर चोरी रोकने में मदद मिलेगी.

उन्होंने बताया कि 15 राज्यों ने राज्य में वस्तुओं की आवाजाही के लिए ई-वे बिल प्रणाली को लागू करने का फैसला किया है. जीएसटी को पिछले साल एक जुलाई से लागू किया गया था, लेकिन ई-वे बिल के प्रावधान को आईटी नेटवर्क की तैयारियां पूरी नहीं होने की वजह से टाल दिया गया था. एक बार ई-वे बिल प्रणाली लागू होने के बाद कर अपवंचना काफी मुश्किल हो जाएगी क्योंकि सरकार के पास 50,000 रुपये से अधिक के सभी सामान की आवाजाही का ब्योरा होगा. अगर आपूर्तिकर्ता या फिर खरीदार में से कोई एक भी रिटर्न दाखिल नहीं करता है, तो इस अंतर को पकड़ा जा सकेगा.