बेंगलुरु: हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) की अनदेखी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में छिड़ी जुबानी जंग के बीच कंपनी के एक शीर्ष कर्मचारी नेता ने बुधवार को दावा किया कि पिछले 15 साल में लाभांश और शेयर पुनर्खरीद में एचएएल ने करीब 15,500 करोड़ रुपए का भुगतान किया है. लाभांश और शेयर पुनर्खरीद में यह भुगतान 2003 से 2018 के बीच किया गया. कंपनी ने 2003-2004 और 2017-18 के बीच लाभांश के रूप में 9,000 करोड़ रुपए दिए हैं. यह भुगतान तब किया गया, जब उसके पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं था.
एचएएल कर्मचारी संघ के महासचिव एस चंद्रशेखर ने कहा कि रक्षा एवं विमानन क्षेत्र के इस प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम एचएएल ने दो बार शेयर पुनर्खरीद कर सरकार को 6,393 करोड़ रुपए का भुगतान किया. चंद्रशेखर ने बताया, “इस तरह से हमें करीब 15,500 करोड़ रुपए खर्च करने पड़े.” एचएएल को अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए हाल ही में 962 करोड़ रुपए का ओवरड्राफ्ट लेना पड़ा. Also Read - पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI को लड़ाकू विमानों जानकारी देते हुए HAL कर्मी गिरफ्तार

चंद्रशेखर की ये टिप्पणियां रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की एचएएल के चेयरमैन आर माधवन के साथ बुधवार की बैठक से पहले आया है. इस दौरान तीनों सेनाओं के प्रमुख भी बैठक में शामिल हुए. इस दौरान कंपनी को उत्पादन आर्डर और भुगतान को लेकर विचार विमर्श होगा. Also Read - HAL ने बनाया दुनिया का सबसे हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर, लद्दाख में होगी इनकी तैनाती

राफेल लड़ाकू विमान सौदे में आफसेट भागीदार बनाने में एचएएल की अनदेखी किए जाने को लेकर विपक्ष लगातार आरोप लगाता आ रहा है. Also Read - रिलायंस Jio-Facebook के बीच सबसे बड़ी डील, हजारों करोड़ों में जुकरबर्ग लेंगे अंबानी की कंपनी में हिस्सेदारी

बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया की सीतारमण ने संसद में इस संबंध में झूठ बोला है कि सरकार ने एचएएल को एक लाख करोड़ रुपए का आर्डर दिया है. उन्होंने कहा था कि सीतारमण अपने इस दावे के समर्थन में या तो दस्तावेज पेश करें या फिर पद से इस्तीफा दें.

राहुल गांधी ने यह हमला तब बोला जब मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि एचएएल को एक लाख करोड़ रुपये में से एक भी रुपया नहीं मिला है और जैसा कि दावा किया गया है, न ही किसी आर्डर के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं. रिपोर्ट में यह दावा एचएएल प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से किया गया.