
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Health Care Budget 2026 Highlights: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपना लगातार नौवां बजट पेश कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया. इतिहास में यह दूसरी बार है जब देश का बजट रविवार के दिन पेश किया गया. इस साल के बजट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सरकार ने स्वास्थ्य को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखा है.
तकनीक, शोध और आम आदमी की जेब को राहत देने वाले इस बजट का मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक मंच पर एक हेल्थ लीडर बनाना है. जानिए इस बजट में आपके स्वास्थ्य और देश की मेडिकल व्यवस्था के लिए क्या खास है.
इस बजट की सबसे क्रांतिकारी घोषणा बायोफार्मा शक्ति पहल है. सरकार का लक्ष्य भारत को दवाओं के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है. इस मिशन के लिए अगले 5 वर्षों में 10,000 करोड़ खर्च किए जाएंगे. वर्तमान में हम कई जटिल दवाओं के लिए विदेशों पर निर्भर हैं. इस पहल से भारत में ही आधुनिक दवाओं का निर्माण होगा, जिससे आयात कम होगा और भारत दुनिया को दवाएं सप्लाई कर सकेगा.
भारत में कैंसर और डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. इन बीमारियों का इलाज काफी महंगा होता है. सरकार ने घरेलू स्तर पर दवाओं के उत्पादन को बढ़ावा देने का फैसला किया है. जब ये दवाएं भारत में ही बनेंगी, तो इनकी विनिर्माण लागत कम हो जाएगी. इसका सीधा फायदा मरीजों को मिलेगा और उन्हें महंगी जीवन रक्षक दवाएं बेहद कम कीमत पर उपलब्ध होंगी.
सिर्फ दवाएं बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसके लिए विशेषज्ञों की भी जरूरत है. इसके लिए बजट में शिक्षा के ढांचे को मजबूत किया गया है. देश में 3 नए राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (NIPER) खोले जाएंगे. पहले से मौजूद 7 संस्थानों को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा ताकि भारतीय छात्र नई दवाओं की खोज में दुनिया का मुकाबला कर सकें.
दवाओं की टेस्टिंग को तेज करने के लिए सरकार ने एक ठोस रोडमैप तैयार किया है. पूरे देश में 1,000 मान्यता प्राप्त क्लीनिकल ट्रायल साइट्स का एक नेटवर्क बनाया जाएगा. इससे नई थेरेपी और दवाओं की जांच जल्दी हो पाएगी और वे जल्द बाजार में आ सकेंगी. आम जनता के लिए सबसे भरोसेमंद जिला अस्पतालों को अपडेट किया जाएगा और वहां इमरजेंसी वार्ड की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि दुर्घटना या आपात स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके.
इलाज की गुणवत्ता को गांव-कस्बों तक पहुंचाने के लिए बड़े बुनियादी ढांचे की घोषणा की गई है. देश में 3 नए एम्स बनाए जाएंगे, जिससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा.
क्षेत्रीय मेडिकल हब विकसित किए जाएंगे, जहां इलाज के साथ-साथ डॉक्टरों की ट्रेनिंग और रिसर्च एक ही छत के नीचे होगी. मानसिक बीमारियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए सरकार ने मौजूदा मेंटल हेल्थ इंस्टिट्यूट को और अधिक आधुनिक बनाने का वादा किया है.
परंपरा और आधुनिकता के संगम के रूप में बजट में आयुष सेक्टर को भी मजबूती दी गई है. देश में 3 नए आयुर्वेद संस्थान खोले जाएंगे. पैरामेडिकल स्टाफ और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स की ट्रेनिंग के लिए मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा और नए ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएंगे.
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