Interest On Interest Case: देश की सर्वोच्च अदालत ने बैंकों के ब्याज पर ब्याज वसूलने (Loan Moratorium Case) की सुनवाई को 18 नवंबर तक के लिए टाल दिया है. सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई उस मामले में होनी थी जो कोविड-19 में लॉकडाउन के दौरान बैंकों को अपनी ईएमआई नहीं दे पाए थे. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने PM मोदी के वाराणसी से निर्वाचन के खिलाफ दायर तेज बहादुर की याचिका पर सुनाया यह फैसला

भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय ने पहले ही शीर्ष अदालत में अलग-अलग अतिरिक्त हलफनामे दाखिल कर कहा है कि बैंक, वित्तीय और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान 5 नवंबर तक पात्र उधारकर्ताओं के खातों में जमा किए गए चक्रवृद्धि और साधारण ब्याज के बीच अंतर को उनके खातों में जमा किया जाएगा. इसका लाभ एग्री को चोड़कर सभी कर्जधारकों को मिलेगा. Also Read - Maharashtra Lockdown Latest News: महाराष्ट्र में फिर लग सकता है लॉकडाउन!, कैबिनेट मंत्री ने दी ये बड़ी जानकारी

बता दें, 1 मार्च से 31 अगस्त के दौरान आरबीआई की ऋण स्थगन योजना का लाभ उठाने के बाद उधारकर्ताओं द्वारा भुगतान नहीं किए गए ईएमआई पर बैंकों द्वारा ब्याज पर ब्याज लिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित इन 4 राज्यों से मांगी स्टेटस रिपोर्ट, कहा- 'दिसंबर में और बदतर हो सकते हैं हालात'

इससे पहले, आरबीआई ने यह कहते हुए हलफनामा दायर किया था कि उसने सभी बैंकों, वित्तीय और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों को पात्र उधारकर्ताओं के खातों में जमा करने के लिए “आवश्यक कार्यवाही” करने के लिए कहा है कि 2 करोड़ रुपये तक के कर्जधारकों से बैंकों ने जो ब्याज पर ब्याज लिया है उसको उनके खातों में ट्रांसफर करेगा.

सरकार ने कहा था कि मंत्रालय ने एक योजना जारी की है, जिसके अनुसार उधार देने वाले संस्थान 6 महीने के ऋण अधिस्थगन अवधि के लिए उधारकर्ताओं के खातों में इस राशि को क्रेडिट करेंगे, जिसे COVID-19 महामारी की स्थिति के बाद घोषित किया गया था.