इन 5 पॉइंट पर पत्नी नहीं मांग सकती मेंटेनेंस, साबित हो गईं ये बातें तो उल्टा पति को ही देना होगा गुजारा-भत्ता, हर कपल को जानना चाहिए ये कानून

देश की जूडिशियल सिस्टम के मुताबिक, अगर कोई पुरुष अपनी पत्नी को तलाक देता है और पत्नी के पास इनकम का कोई ऑप्शन नहीं है, तो पति को हर महीने अपने पत्नी को गुजारा भत्ता देना होता है. मेंटेनेंस किसे और क्यों मिलेगा? ये केस टू केस निर्भर करता है.

Published date india.com Updated: October 17, 2025 9:11 PM IST
इन 5 पॉइंट पर पत्नी नहीं मांग सकती मेंटेनेंस, साबित हो गईं ये बातें तो उल्टा पति को ही देना होगा गुजारा-भत्ता, हर कपल को जानना चाहिए ये कानून
फोटो का इस्तेमाल सांकेतिक तौर पर किया गया है.

भारतीय समाज में शादी दो लोगों के बीच का बंधन ही नहीं, बल्कि दो परिवार का भी बंधन होता है. लेकिन, कई बार शादियां नहीं चल पाती. आपसी टकराव या किन्हीं कारणों से बेडरूम का झगड़ा आखिरकार कोर्ट रूम तक जा पहुंचता है. बात डिवोर्स तक आ जाती है. डिवोर्स के मामले में मेंटेनेंस एक अहम पॉइंट होता है.

देश की जूडिशियल सिस्टम के मुताबिक, अगर कोई पुरुष अपनी पत्नी को तलाक देता है और पत्नी के पास इनकम का कोई ऑप्शन नहीं है, तो पति को हर महीने अपने पत्नी को गुजारा भत्ता देना होता है. आइए समझते हैं क्या होता है गुजारा-भत्ता? पत्नी को किन पॉइंट पर पति से नहीं मिल सकता मेंटेनेंस? किस आधार पर पति अपनी पत्नी से मांग सकता है मेंटेनेंस:-

मेंटेनेंस यानी गुजारा-भत्ता क्या होता है?
जब एक व्यक्ति दूसरे कमजोर या अक्षम व्यक्ति को खाना, कपड़ा, घर, एजुकेशन और मेडिकल जैसी बेसिक जरूरत की चीजों के लिए आर्थिक मदद करता है, तो उसे गुजारा-भत्ता यानी मेंटेनेंस कहते हैं. डिवोर्स के मामले में अगर पत्नी के पास अपना खुद का खर्च चलाने का साधन नहीं है या वो इस काबिल नहीं है, तो पति को उसे गुजारा भत्ता देना होता है.

दो तरीकों से दिया जाता है गुजारा भत्ता
हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के तहत गुजारा-भत्ता दो तरह का होता है. पहला- अंतरिम गुजारा-भत्ता या अस्थायी भत्ता. दूसरा- परमानेंट गुजारा-भत्ता या स्थायी भत्ता. जब मामला कोर्ट में पेंडिंग हो और उस बीच जो गुजारा-भत्ता तय किया जाता है, वह अंतरिम गुजारा-भत्ता होता है. जबकि तलाक के अंतिम फैसले में कोर्ट के द्वारा तय की गई राशि पति को आजीवन पत्नी को देनी होती है. इसे परमानेंट गुजारा भत्ता कहते हैं.

मेंटेनेंस को लेकर क्या है कानून?
हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के सेक्शन 125 के तहत पति और पत्नी दोनों एक-दूसरे से गुजारा भत्ता मांग सकते हैं. स्पेशल मैरिज एक्ट के सेक्शन 36 और 37 में गुजारे-भत्ते के बारे में जरूरी प्रावधान किए गए हैं.

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गुजारे-भत्ते के लिए कोर्ट में अर्जी कब लगा सकते हैं?
गुजारे-भत्ते का सवाल तभी पैदा होता है, जब स्त्री और पुरुष पति-पत्नी की तरह एक छत के नीचे न रह रहे हों. दोनों तलाक चाह रहे हों. इसका केस कोर्ट में पेंडिंग हो या निपट चुका हो और अलग होने की शर्तों को दोनों पक्ष मान रहे हों. भारतीय कानून यह मानता है कि पत्नी अपनी आजीविका के लिए पति पर निर्भर है. ऐसे में पत्नी तलाक के समय कोर्ट से गुजारे-भत्ते, कंपन्सेशन की मांग कर सकती है.

मेंटेनेंस तय करने में कोर्ट क्या देखता है?
किसी भी केस में मेंटेनेंस तय करने में कोर्ट कुछ बातों पर गौर करता है. मसलन तलाक या सैपरेशन का कारण क्या है? गुजारा-भत्ता देने और मांगने वाले दोनों पक्षों की कमाई के सोर्स क्या-क्या हैं? महिला की आर्थिक स्थिति, जरूरतें और जिम्मेदारियां कैसी हैं? पति की आर्थिक स्थिति और जिम्मेदारियां जैसे बच्चे, माता-पिता, आश्रित ब्लड रिलेशन वगैरह की क्या स्थिति है?

मेंटेनेंस के तौर पर कितना पैसा देना होता है?
आमतौर पर गुजारा-भत्ता के मामले में पति की सैलरी या इनका का करीब 20-25% पत्नी को देना पड़ता है. अगर पति बेरोजगार है, तो भी अपनी पत्नी और बच्चों को गुजारा-भत्ता देना उसका दायित्व है. इसके लिए चाहे वो अपनी कोई प्रॉपर्टी पत्नी या बच्चों के नाम कर दे.

पति को कब देना पड़ेगा गुजारा-भत्ता?
अगर पति की फाइनेंशियल कंडीशन अच्छी है. पत्नी नौकरी नहीं करती. उसकी फाइनेंशियल कंडीशन भी अच्छी नहीं है. ऐसे केस में पति को गुजारा भत्ता देना होगा. इसी तरह अगर पत्नी मानसिक तौर पर बीमार है या उसे गंभीर बीमारी है या दिव्यांग है, तो भी पति को गुजारा भत्ता देना होगा. अगर दंपति के बच्चे हैं, तो पति को पिता के तौर पर अपने बच्चों के भरण-पोषण का खर्च उठाना होगा.

किन पॉइंट पर पत्नी को नहीं मिलेगा गुजारा-भत्ता?

  • पत्नी अगर बिना की वैलिड रीजन के अपनी शादी तोड़ रही है और पति से अलग हो रही है, तो उसे गुजारा-भत्ता नहीं मिल सकता.
  • पति-पत्नी अगर आपसी सहमति से अलग होने का फैसला ले रहे हैं, तो मेंटेनेंस की बात नहीं आती.
  • पत्नी पढ़ी-लिखी हो और कमा रही हो, तो भी मेंटेनेंस नहीं मांगा जा सकता.
  • अगर पत्नी का किसी और से फिजिकल रिलेशन है और इस वजह से शादी टूट रही है, तो भी पत्नी मेंटेनेंस नहीं क्लेम कर सकती.
  • अगर पत्नी ने तलाक के तुरंत बाद दूसरी शादी कर ली हो, तो मेंटेनेंस नहीं मांग सकती.

मतलब पत्नी अगर कमाती है तो किसी भी स्थिति में मेंटेनेंस नहीं मांग पाएगी?
ऐसा नहीं है. मेंटेनेंस के मामले में कोर्ट दोनों पार्टी की इनकम और प्रॉपर्टी देखता है. अगर पति की इनकम पत्नी से कई गुना ज्यादा है, तो ऐसी स्थितियों में कोर्ट पति को गुजारा-भत्ता देने का आदेश दे सकता है. इस केस में अगर पत्नी कमाती भी है, लेकिन उसकी कमाई पति से कम है, तो उसे गुजारा-भत्ता मिलेगा. ये हर महीने भी मिल सकता है या लंपसम भी लिया जा सकता है. सेलिब्रेटीज के मामले में ऐसा ही देखने को मिलता है.

किन परिस्थितियों में पति अपनी पत्नी से मांग सकता है गुजारा-भत्ता?

  • अगर पति आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं है और पत्नी आत्मनिर्भर है, तो पति गुजारा भत्ता मांग सकता है.
  • अगर पति गंभीर रूप से बीमार है, उसका इलाज चल रहा है. पत्नी कमाती है, तो वह अपनी जरूरतों के लिए पत्नी से गुजारा भत्ता मांग सकता है.
  • अगर पति दिव्यांग है या किसी भी कारण से अपनी आजीविका कमाने में सक्षम नहीं है, तो भी मेंटेनेंस क्लेम किया जा सकता है.
  • अगर पति की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, तो उसे गुजारा-भत्ता पाने का हक है.
  • इन सभी स्थितियों में पत्नी पर गुजारा-भत्ता देने का दायित्व तभी होता है, जब वह आर्थिक रूप से मजबूत हो, सक्षम हो और पैसे कमा रही हो.

अगर पति की मौत हो जाए, तो क्या महिला ससुरालवालों से मांग सकती है मेंटेनेस?
हां. कानून में ऐसी व्यवस्था है. पति की मौत के बाद विधवा बहू भरण-पोषण कानून 1950 की धारा 19 के तहत अपने ससुर से गुजारा-भत्ता मांग सकती है. ससुर नहीं होने पर सास से गुजारा भत्ता मांगा जा सकता है. दोनों के न होने पर अगर जेठ हैं, तो संपत्ति में पति का भी हिस्सा था, तो मेंटेनेंस मांगा जा सकता है.

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