
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Home Loan EMI Recovery Rules: घर खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे बड़ा वित्तीय और भावनात्मक फैसला होता है. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में प्रॉपर्टी की कीमतें इतनी ज्यादा हैं कि बिना होम लोन के घर लेना लगभग असंभव है. लेकिन 20 से 30 साल की लंबी अवधि के इस कर्ज के साथ एक बड़ा जोखिम भी जुड़ा होता है.
यहां जानिए कि यदि कोई व्यक्ति होम लोन की ईएमआई चुकाना बंद कर देता है तो बैंकिंग नियमों के तहत उसके साथ क्या-क्या हो सकता है और बैंक अपनी रिकवरी के लिए किन कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करता है.
जैसे ही आप होम लोन की पहली ईएमआई मिस करते हैं, उसका सीधा असर आपके सिबिल (CIBIL) या क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है. बैंक ऑफ बड़ौदा और अन्य वित्तीय संस्थानों के अनुसार, मात्र एक ईएमआई डिफॉल्ट करने से आपके क्रेडिट स्कोर में 50 से 70 अंकों तक की भारी गिरावट आ सकती है. खराब क्रेडिट स्कोर का मतलब है कि भविष्य में आपको किसी भी प्रकार का लोन (कार लोन, पर्सनल लोन) या क्रेडिट कार्ड मिलने में अत्यधिक कठिनाई होगी.
ईएमआई मिस होने पर बैंक केवल चुप नहीं बैठते. वे बकाया राशि पर लेट फीस और पीनल इंटरेस्ट लगाना शुरू कर देते हैं. यह ब्याज दर आपके सामान्य होम लोन की दर से काफी अधिक हो सकती है. जैसे-जैसे महीने बीतते हैं, यह जुर्माना चक्रवृद्धि ब्याज की तरह बढ़ता जाता है, जिससे कर्ज का बोझ और भी भारी हो जाता है.
बैंकिंग नियमों के अनुसार, यदि कोई ग्राहक लगातार 90 दिनों (3 महीने) तक ईएमआई का भुगतान नहीं करता है, तो बैंक उस लोन खाते को NPA घोषित कर देता है. यह वह स्थिति है जहां बैंक मान लेता है कि अब इस कर्ज की वसूली सामान्य तरीके से संभव नहीं है.
NPA घोषित होने के बाद बैंक सरफेसी एक्ट, 2002 के तहत रिकवरी की प्रक्रिया शुरू करता है. इसके तहत बैंक को यह कानूनी अधिकार मिलता है कि वह बिना अदालत गए गिरवी रखी गई संपत्ति (आपका घर) को अपने कब्जे में ले सके.
बैंक सबसे पहले ग्राहक को 60 दिनों का डिमांड नोटिस भेजता है, जिसमें बकाया राशि चुकाने की अंतिम चेतावनी दी जाती है. यदि नोटिस अवधि में भुगतान नहीं होता, तो बैंक प्रॉपर्टी का सांकेतिक कब्जा ले लेता है और अंततः प्रशासन की मदद से घर को सील कर देता है.
बैंक अपना पैसा वसूलने के लिए घर की नीलामी की तारीख तय करता है. नीलामी से प्राप्त राशि से बैंक अपना मूलधन, ब्याज और कानूनी खर्च वसूलता है. यदि नीलामी के बाद कुछ पैसा बचता है, तो वह ग्राहक को वापस कर दिया जाता है.
नीलामी की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद, कानून ग्राहक को एक मौका देता है. नीलामी संपन्न होने से पहले, यदि कर्जदार बैंक का पूरा बकाया, जुर्माना और कानूनी खर्च एकमुश्त जमा कर देता है, तो वह अपनी संपत्ति वापस पा सकता है.
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