How Phonepe Paytm And Google Pay Upi Apps And Payment Banks Like Generate Revenue Know How Apps Are Profitable
PhonePe, Paytm और Google Pay जैसे पेमेंट बैंक कैसे जेनरेट करते हैं रेवन्यू? जानें कैसे फायदे में हैं इन UPI ऐप्स का कारोबर
Payment bank & UPI Apps Revenue Model: क्या आपने कभी गौर किया है कि जो UPI ऐप्स और पेमेंट बैंक, देश की ट्रांजैक्शन इकोनॉमी को लगभग कैशलेस बना चुके हैं. बैंक और यूजर के बीच काम करने वाले ये इंटरमीडियरी बेहतरीन पेमेंट सर्विस देने के बावजूद अपनी सर्विस के लिए एक पैसा नहीं चार्ज करते हैं, वे कैसे अपना रेवन्यू कैसे जेनरेट करते हैं. आइये जानते हैं पेमेंट बैंक और UPI एप्स के कमाई के बारे में...
UPI ऐप्स और पेमेंट बैंक की दुनिया! जानें बिना आपसे पैसे लिए कैसे चलता है इनका भारी-भरकम कारोबार?
How PhonePe earns money: डिजिटल इंडिया के इस दौर में हम दिन भर में कई बार ‘स्कैन एंड पे’ करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब Google Pay या PhonePe हमसे कोई फीस नहीं लेते, तो फिर ये अपने हजारों कर्मचारियों की सैलरी और बिजनेस का खर्च कैसे निकालते होंगे? आइए जानते हैं कि ये पेमेंट बैंक और UPI ऐप्स कैसे रेवन्यू जेनरेट करते हैं…
देश के पॉपुलर पेमेंट बैंक और UPI ऐप्स
भारत में डिजिटल पेमेंट की कमान मुख्य रूप से दो तरह के प्लेयर्स के हाथ में है. पहले वे जो सिर्फ UPI ऐप हैं, जैसे Google Pay और PhonePe, और दूसरे पेमेंट बैंक, जैसे Airtel Payments Bank और Paytm Payments Bank. पेमेंट बैंक नॉर्मल बैंकों से अलग होते हैं, क्योंकि ये आपको लोन नहीं दे सकते, लेकिन अपने डिजिटल वॉलेट में आपके पैसे जमा रख सकते हैं. आज करोड़ों भारतीय इन प्लेटफॉर्म्स की मदद से बिजली बिल से लेकर छोटी दुकानों तक पर पेमेंट कर रहे हैं. साथ ही नकद लेन-देन को काफी हद तक कैशलेस बना दिया है.
पॉपुलर पेमेंट बैंक और UPI ऐप्स, असल में एक ब्रिज या इंटरमीडियरी की तरह काम करते हैं. जब आप किसी को पैसे भेजते हैं, तो UPI ऐप आपके बैंक को मैसेज भेजता है, बैंक उस ट्रांजैक्शन को ऑथेंटिकेट करता है और NPCI (National Payments Corporation of India) के जरिए पैसा दूसरे बैंक खाते में पहुंच जाता है. ये प्रोसेस भी पलक झपकते ही कंप्लीट हो जाती है. वहीं, ये ऐप्स यूजर एक्सपीरियंस को इतना स्मूथ बना देते हैं कि यूजर को बैंक के स्लो सर्वर या जटिल ऐप्स का सामना नहीं करना पड़ता है. इन पेमेंट बैंक और UPI ऐप्स की खासियत इनके पास एक भारी यूजर बेस बनाते हैं.
चूंकि, पेमेंट बैंक लोन नहीं दे सकते, इसलिए उनकी कमाई का जरिया नॉन-इंटरेस्ट इनकम पर निर्भर है. वे लोगों के मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल और इंश्योरेंस पेमेंट पर रिसीवर कंपनियों से मोटा कमीशन कमाते हैं. इसके अलावा, पेमेंट बैंक अपने पास जमा डिपॉजिट का 75% हिस्सा सरकारी सिक्योरिटीज (Government Bonds) में निवेश करते हैं, जहां से उन्हें सुरक्षित इंटेस्ट मिलता है. इसके साथ ही वे, म्यूचुअल फंड, गोल्ड और इंश्योरेंस बेचकर भी तगड़ा ब्रोकरेज (Brokerage) कमाते हैं.
जाते-जाते बताते चलें कि इनके कमाई का अनोखा जरिया, एक दुकानों पर लगा इन कंपनियों के साउंडबॉक्स भी है. ये साउंडबॉक्स पेमेंट रिसीव होते ही दुकानदार को इसकी सूचना देता है. बता दें कि ये कंपनियों मर्चेंट को इन साउंडबॉक्स का सब्सक्रिप्शन देकर भी बड़ा रेवेन्यू जेनरेट करते हैं,
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