India-China Border News: एलएसी पर भारत के साथ तनाव के कारण देश के भीतर चीन विरोधी माहौल तेजी से मुखर हो रहा है. सरकार के साथ निजी क्षेत्र की कंपनियों ने भी चीन की कंपनियों के साथ कारोबार को लेकर सजग हो गई हैं. इस बीच चीन और अमेरिका के बीच भी इस वक्त तनाव चरम पर है. ऐसे में अमेरिका भी चीन की कंपनियों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर माहौल बनाने में लगा है. Also Read - LAC पर तनाव का असर! दिल्ली के होटल और गेस्टहाउस में चीनी नागरिकों की नो एंट्री

इस कड़ी में अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने चीन की कंपनियों के साथ कारोबार से इनकार करने वाली दूरसंचार फर्मों की सराहना की है. उन्होंने कहा कि फ्रांस की ऑरेंज, भारत की जियो और ऑस्ट्रेलिया की टेल्सट्रा ‘साफ-सुथरी’ कंपनियां हैं. इन्होंने चीन की कंपनियों के साथ कारोबार करने से इनकार किया है. पोम्पियो ने दावा किया कि चीन की प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी हुवावेई (Huawei) के दुनिया की दूरसंचार कंपनियों के साथ करार धीरे-धीरे कम हो रहे हैं. Also Read - रिलायंस समूह का कर्जा उतारने के लिए जियो ने फिर बेची हिस्सेदारी, अब तक करीब 90 हजार करोड़ रुपये आए

पोम्पियो ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘दुनिया की प्रमुख दूरसंचार कंपनियां मसलन स्पेन की टेलीफोनिका के अलावा ऑरेंज, ओ2, जियो, बेल कनाडा, टेलस और रॉजर्स तथा कई और अब साफ-सुथरी हो रही हैं. ये कंपनियां चीन की कम्युनिस्ट संरचना से अपने संपर्क तोड़ रही हैं. उन्होंने कहा कि ये कंपनियां निगरानी करने वाले देशों की कंपनियों मसलन Huawei के साथ अब कारोबार करने से इनकार कर रही हैं. पोम्पियो ने कहा कि अब माहौल चीन की प्रौद्योगिकी कंपनी के खिलाफ होता जा रहा है. Also Read - रिलायंस जियो लाया धमाकेदार प्रीपेड एनुअल प्लान्स, कोई भी कंपनी नहीं आस-पास, हर रोज मिलेगा इतना डाटा

उन्होंने कहा कि दुनियाभर के दूरसंचार ऑपरेटरों के साथ हुवावेई के करार समाप्त हो रहे हैं, क्योंकि ये देश अपने 5जी नेटवर्क के लिए भरोसेमंद वेंडर की सेवाएं ही लेना चाहते हैं. उन्होंने इसके लिए चेक गणराज्य, पोलैंड, स्वीडन, एस्टोनिया, रोमानिया, डेनमार्क का उदाहरण दिया. पोम्पियो ने कहा कि हाल में यूनान ने भी अपने 5जी ढांचे के विकास का काम हुवावई के बजाय एरिक्सन को देने की सहमति दी है.