न्यूयॉर्क: भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि की दर अगले एक दशक में 7 से 8 प्रतिशत पर बने रहने की संभावना है. जेटली ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता सहिंता (आईबीसी) जैसे सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि इस कानून की प्रक्रिया से विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए आकर्षक और अनुकूल अवसर उपलब्ध हो रहे हैं.

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोध
अरुण जेटली ने यहां स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास में ‘संकटग्रस्त परिसंपत्तियों के समाधान की नई मिसाल- दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता पर आयोजित सम्मेलन’ को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया. सम्मेलन में वित्त मंत्रालय में प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव सान्याल, भारतीय दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता बोर्ड के चेयरमैन एम एस साहू और महावाणिज्य दूत संदीप चक्रवर्ती, उद्योग जगत के विश्लेषक, निवेशक एवं नीति विशेषज्ञ उपस्थित थे. कार्यक्रम का आयोजन वाणिज्य एवं उद्योग मंडल फिक्की ने आईबीबीआई और न्यूयार्क स्थिति भारतीय महावाणिज्य दूतावास के सहयोग से किया.

तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था
उन्होंने कहा, पिछले कुछ वर्षों में यह निर्विवाद रूप से साबित हुआ है कि भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. यह उभरती हुयी अर्थव्यवस्थाओं में अपने कुछ समकालीन देशों की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है. मेरा मानना है कि अगले दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि कम से कम 7 से 8 प्रतिशत रह सकती है. जेटली ने कहा कि सात प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर को भारतीय मानकों के तहत अब निचला स्तर माना जा रहा है. हमारी आकांक्षा 7 प्रतिशत से ऊपर की है.

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आईबीसी प्रक्रिया के माध्यम से भारत में निवेश के अवसरों पर प्रकाश डालते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की भविष्य की संभावना काफी बेहतर है, आईबीसी अपना काम कर रहा है, जहां तक निवेशकों का संबंध है यह एक शानदार अवसर है और इसलिये वे भारत में निवेश के बारे में गंभीरता से सोच रहे हैं. जेटली ने कहा कि मौजूदा अवसर से बेहतर अवसर नहीं हो सकता है. आईबीसी की प्रक्रिया के तहत यह पेशकश उपलब्ध हो रही है. यह सही समय है और इस तरह के निवेश के लिए भारत सही जगह है. (इनपुट एजेंसी)