IIM Indore: कोरोना महामारी (Corona Pandemic) की दूसरी लहर ने उद्योग जगत को बुरी तरह प्रभावित किया है, आर्थिक गतिविधियों (Economic Activities) पर बुरा असर पड़ा है. कोरोना के बाद उद्योग जगत को कैसे उबारा जाए, इसके लिए इंदौर का भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) शोध करेगा. इसके लिए आईआईएम आने वाले दिनों में द ड्यूश गेसेलशाफ्ट फर इंटरनेशनल जुसामेनरबीट (जीआईजेड) और जर्मन फेडरल मिनिस्ट्री फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट के साथ शोध का काम करेगा. ज्ञात हो कि कोरोना महामारी ने व्यापारिक जगत की कमर तोड़ दी है, अब उनके सामने इस बात की चुनौती है कि आगामी समय में कारोबार को कैसे चलाया जाए और जो चुनौती आए उससे कैसे निपटा जाए. इसी को लेकर शोध किया जाने वाला है.Also Read - गोदरेज इंडस्ट्रीज का शुद्ध लाभ चौथी तिमाही में बढ़कर 423 करोड़ रुपये पर पहुंचा

इस शोध के दौरान यह रास्ता खोजा जाएगा कि उद्योग आगामी समय की चुनौतियों के लिए किस तरह से तैयार हो, इसके लिए आईआईएम इंदौर को 85.3 लाख रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ है. Also Read - पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर! रक्षा मंत्रालय ने जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाया, जून की इस तारीख तक कर पाएंगे जमा

बताया गया है कि शोध के दौरान व्यावसायिक क्षेत्रों में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए किए गए उपायों के दस्तावेज तैयार किए जाएंगे. ताकि भविष्य में महामारी का सामना करने के लिए कुछ बेहतरीन उपाय हासिल किए जा सकेंगे. Also Read - दावोस की वार्षिक बैठक खत्म, डब्ल्यूईएफ ने सभी के लिए बेहतर दुनिया बनाने का किया आह्वान

आईआईएम इंदौर के डायरेक्टर प्रो. हिमांशु राय का मानना है कि इस शोध के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे. विभिन्न क्षेत्रों के लिए यह शोध लाभकारी सिद्ध होगा. यह भविष्य में किसी भी महामारी का सामना करने के लिए हमें तैयार करेगा. साथ ही इससे भारत में भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों को आकार देने में भी मदद मिलेगी.

(IANS)