दुबई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड ने रविवार को दुनिया के देशों के जरूरत के मुताबिक रोजगार के अवसर पैदा करने की नसीहत दी. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बेरोजगारी बढ़ने से गरीबी बढ़ेगी और युवाओं के अतिवादी होने का खतरा है. लेगार्ड ने कहा कि 2008 के वित्तीय संकट की यादें अभी भूलीं नहीं हैं.Also Read - देश में सबसे कम बेरोजगारी दर कर्नाटक में, हरियाणा में सबसे अधिक, जानें यूपी-बिहार का है कौन सा नंबर

आईएमएफ की प्रबंध निदेशक ने हाल ही में दुनिया के कई देशों का झुकाव संरक्षणवाद की तरफ होने को लेकर सीख लेने को कहा. उन्होंने कहा कि बिना रोजगार के लोगों के रहते देशों में गरीबी गहराने और लोगों के अतिवादी अथवा उग्र रूप लेने का खतरा हो सकता है. लेगार्ड रविवार को दुबई में वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट 2018 के एक सत्र को संबोधित कर रही थी. Also Read - Cryptocurrency: क्रिप्टो संपत्तियों को विनियमित करना जरूरी, बैन लगाने से नहीं चलेगा काम: गीता गोपीनाथ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी पिछले महीने विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बैठक में अपने संबोधन में कहा था कि कई देशों में संरक्षणवादी सोच जोर पकड़ती जा रही है. वैश्वीकरण की सोच सिकुड़ने लगी है. इस तरह की प्रवृति को आतंकवादी अथवा जलवायु परिवर्तन के खतरे से कम नहीं आंका जा सकता है. Also Read - PM मोदी से मिलीं IMF की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता गोपीनाथ, PMO ने शेयर की ये तस्वीर