नई दिल्ली: आयकर विभाग ने कैफे कॉफी डे (सीसीडी) प्रवर्तक वी.जी. सिद्धार्थ के खिलाफ अपनी जांच के दौरान प्रताड़ित करने के आरोपों से मंगलवार को इनकार किया. आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि उनके पास सिद्धार्थ के जो हस्ताक्षर उपलब्ध हैं वह उस पत्र पर हस्ताक्षर से अलग हैं जिसे सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि उद्योगपति ने अपने और अपने प्रतिष्ठानों पर छापों के बाद कुछ आय छिपाकर रखना स्वीकार किया था. आयकर अधिकारियों ने उनके मोबाइल फोन से कई मैसेज प्राप्त किये थे जो सीमापार हवाला लेन-देन में उनकी सक्रिय संलिप्तता का संकेत देते हैं.

बिना हिसाब की आय होना स्वीकार किया था
समूह के खिलाफ छापे कर्नाटक के एक प्रमुख राजनीतिज्ञ के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई के परिणामस्वरूप मारे गए थे और सूत्रों ने कहा कि सिद्धार्थ ने एक हलफनामे में अपने हाथ में और कॉफ़ी डे इंटरप्राइजेज लिमिटेड की क्रमश: 362.11 करोड़ रुपए और 118.02 करोड़ रुपए की बिना हिसाब की आय होना स्वीकार किया था.

सिद्धार्थ ने प्रताड़ित करने की बात पत्र में कही
बता दें कि सोमवार की शाम सिद्धार्थ कर्नाटक में बेंगलुरू से मंगलुरू जाते समय रास्ते में लापता हो गए हैं. एक पत्र में सिद्धार्थ ने कहा है कि आयकर विभाग के पूर्व डीजी की ओर से काफी प्रताड़ित किया गया. यह हमारे माइंडट्री सौदे को रोकने के लिए दो अलग-अलग मौकों पर हमारे शेयर जब्त करने और बाद में हमारे कॉफी डे शेयर का अधिकार लेने के तौर पर आया, जबकि हमने संशोधित रिटर्न दाखिल कर दिया था. यह बहुत अनुचित था और इससे हमें नकदी का गंभीर संकट झेलना पड़ा.

तलाशी विश्वसनीय साक्ष्यों पर आधारित थी
आरोपों को खारिज करते हुए सूत्रों ने कहा कि विभाग की ओर से शेयरों की अस्थायी जब्ती की कार्रवाई कर बचाने के मामलों में राजस्व हितों के संरक्षण के लिए की गई थी और वह तलाशी या उन छापों के दौरान जुटाए गए विश्वसनीय साक्ष्यों पर आधारित थी जो कि बेंगलुरू स्थित समूह के खिलाफ 2017 में की गई थी. विभाग ने आयकर कानून के प्रावधानों के अनुरूप कार्य किया. सूत्र ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे पत्र की सत्यता को प्रमाणित नहीं किया जा सकता, क्योंकि सिद्धार्थ का हस्ताक्षर उससे मेल नहीं खाता, जो कंपनी के वार्षिक रिपोर्ट के रूप में विभाग के पास उपलब्ध है.

300 करोड़ रुपए में से मात्र 46 करोड़ रुपए का भुगतान किया
विभाग ने कहा कि सिद्धार्थ को माइंडट्री शेयर की बिक्री से 3200 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे, लेकिन सौदे पर देय कुल 300 करोड़ रुपए के न्यूनतम वैकल्पिक कर में से मात्र 46 करोड़ रुपए का भुगतान किया. इस मामले में सिंगापुर के एक नागरिक की तलाशी ली गई थी और उसके पास से 1.2 करोड़ रुपए की बिना हिसाब की नकदी मिली थी और व्यक्ति ने आयकर अधिकारियों को बताया था कि वह सिद्धार्थ की है.

अघोषित आय का उल्लेख नहीं किया
अफसर ने लगाया कि सीसीडी प्रमोटर ने अपना आईटी रिटर्न दाखिल किया, लेकिन व्यक्तिगत मामले में 35 करोड़ की राशि को छोड़कर दोनों ही मामले में अघोषित आय का उल्लेख नहीं किया, जबकि हलफनामे में उन्होंने इस बारे में स्वीकार किया था.

सिद्धार्थ ने अपनी इस स्वीकार राशि पर भी 14.5 करोड़ रुपए के स्व-मूल्यांकन कर का भुगतान नहीं किया. कॉफी डे इंटरप्राइजेज लिमिटेड ने अपनी तरफ से स्वीकृत आय की पेशकश नहीं की. विभाग को इस साल खबरों से पता चला कि सिद्धार्थ माइंडट्री लिमिटेड के इक्विटी शेयर तत्काल आधार पर बेचने की योजना बना रहे हैं, जो कि उनके और उनकी कंपनी के पास थे. सिद्धार्थ और कॉफी डे इंटरप्राइजेज लिमिटेड दोनों के पास माइंडट्री लिमिटेड के करीब 21 प्रतिशत शेयर थे. यह भी पता चला कि शेयर की बिक्री के लिए सौदे को एक महीने के भीतर पूरा किया जाना था.

करोड़ों रुपए के कर का मामला बनता था तो शेयर जब्त किए गए
अफसर ने कहा कि चूंकि इस मामले में करोड़ों रुपए के कर का मामला बनता था और करदाता ने इन शेयरों को बेचने के लिए आयकर प्राधिकारियों से अनुमति नहीं ली थी, उन्हें नियमों के तहत जब्त कर लिया गया. माइंडट्री लिमिटेड के 74,90,000 शेयर जब्त किए गए और कर अपवंचना के बड़े मामलों में राजस्व हितों के संरक्षण के लिए ऐसी कार्रवाई सामान्य होती है.

आयकर व‍िभाग ने उनकी पेशकश स्‍वीकार की थी
सिद्धार्थ ने तब इन शेयरों को मुक्त करने के लिए एक अनुरोधपत्र दिया था और अपेक्षित मांग के खिलाफ सिक्युरिटी के तौर पर कॉफी डे इंटरप्राइजेज के शेयरों की पेशकश की थी. विभाग ने इसे स्वीकार कर लिया था और इस वर्ष 13 फरवरी को माइंडट्री के शेयर की जब्ती समाप्त कर दी गई.

माइंडट्री के शेयर बेंचकर 3,200 करोड़ रुपए प्राप्त किए थे
13-14 फरवरी को 46,01,869 ऐसे शेयरों जो बंधक नहीं थे और कॉफी डे इंटरप्राइजेज के बंधक 2,04,43,055 शेयरों का वैकल्पिक जब्ती की गई. करदाता (सिद्धार्थ) ने 28 अप्रैल को माइंडट्री लिमिटेड के शेयरों को एलएंडटी इंफोटेक लिमिटेड को हस्तांतरित कर दिया और लगभग 3,200 करोड़ रुपए प्राप्त किए. सिद्धार्थ और उनकी कंपनी ने लगभग 3,000 करोड़ रुपए का ऋण चुकाया और 154 करोड़ रुपए के हस्तांतरण से संबंधित खर्चों का भुगतान किया और बाकी बचे 46 करोड़ रुपए का भुगतान कॉफी डे इंटरप्राइजेज लिमिटेड के शेयरों के मामले में करीब 300 करोड़ रुपए की न्यूनतम वैकल्पिक कर देनदारी की अग्रिम कर की पहली किस्त के तौर पर किया गया.