Income Tax Refund Tips: ITR फाइल करते समय किन बातों का रखें ध्यान, ताकि रिफंड मिलने में न हो देरी, जानें- यहां

Income Tax Refund Tips: इनकम टैक्स रिफंड अकाउंट में आना एक सुखद अनुभव होता है, लेकिन देरी से खुशी कम हो जाती है. ऐसी देरी से बचने के लिए, टैक्सपेयर्स को सटीक और समय पर ITR फाइल करना चाहिए.

Written by: Manoj Yadav
Updated: July 19, 2023, 10:38 AM IST

ITR Filing Tips To Get Refund: आयकर रिटर्न (Income Tax Return) फाइल करना हर टैक्सपेयर की जिम्मेदारी है. लेकिन फाइल करने के बाद हर टैक्सपेयर को अपने रिफंड का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है. यह रिफंड आपकी ही कमाई का हिस्सा होता है, जो टैक्स के तौर पर सरकार को पेमेंट की गई एडिशनल अमाउंट होता है. अगर रिफंड समय पर नहीं आता है या मिलने में देरी होती है तो यह निराशाजनक और असुविधाजनक हो सकता है. इसलिए समय पर रिफंड प्रॉसेस को सुनिश्चित करने के लिए, टैक्सपेयर्स को अपना रिटर्न फाइल (ITR Filing mistakes) करते समय कुछ फैक्टर्स को ध्यान में रखना चाहिए.

आइए, यहां पर जानते हैं कि ITR रिफंड में देरी से बचने के लिए किन चीजों से बचना चाहिए?

सटीक और समय पर ITR फाइलिंग

ITR रिफंड में देरी का एक मुख्य कारण गलत तरीके से या ITR फाइल करने में देरी है. टैक्सपेयर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपना रिटर्न सही तरीके से और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा तय की गई समय सीमा के भीतर जमा करें. समय पर फाइल न करने पर पेनाल्टी देनी पड़ सकती है और रिफंड प्रॉसेस में देरी भी हो सकती है.

अपने कांटैक्ट्स को अपडेट करें

रिफंड स्थिति पर समय पर अपडेट पाने के लिए सही और अपडेटेड कांटैक्ट्स के बारे में जानकारी देना जरूरी होता है. आयकर विभाग (Income Tax Department) अक्सर ईमेल और एसएमएस के जरिए कांटैक्ट करता है. किसी भी महत्वपूर्ण सूचना के बारे में जानकारी पाने के लिए रिटर्न फाइलिंग में एक वैध ईमेल पता और मोबाइल नंबर होना बहुत जरूरी होता है.

बैंक अकाउंट डीटेल्स वेरीफाई करें (Verify Bank Details)

रिफंड मिलने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो. इसके लिए बैंक अकाउंट डीटेल्स की फिर से जांच करना जरूरी होता है. आयकर विभाग रिफंड राशि सीधे टैक्सपेयर के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करता है. बैंक अकाउंट नंबर या IFSC कोड में किसी भी गलती से रिफंड ट्रांसफर होने में देरी हो सकती है या फेल भी हो सकता है.

रिटर्न का ई-वेरीफिकेशन (ITR E-Verification)

ऑनलाइन टैक्स रिटर्न फाइल करने के बाद उसे तुरंत वेरीफाई करना जरूरी होता है. आयकर विभाग ई-वेरीफिकेशन के विभिन्न तरीके प्रदान करता है, जैसे आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग और इलेक्ट्रॉनिक वेरीफिकेशन कोड (EVC). वेरीफिकेशन प्रॉसेस में देरी करने से आपके रिफंड के लिए प्रॉसेसिंग का समय बढ़ सकता है.

बकाया चुकाएं

यदि आपके पास पिछले मूल्यांकन वर्षों से कोई बकाया कर देनदारियां या बकाया है, तो चालू वर्ष के रिटर्न फाइल करने से पहले उन्हें चुकाना महत्वपूर्ण है. आयकर विभाग किसी भी पेंडिंग टैक्स के बदले आपके रिफंड की भरपाई कर सकता है, जिससे और देरी हो सकती है.

गलत टैक्स कटौती से बचें

यह सुनिश्चित करें कि आपका इंप्लॉयर सोर्स पर टैक्स की सही कटौती करता है और सटीक इनकम और TDS (स्रोत पर कर कटौती) डीटेल्स दर्शाते हुए फॉर्म 16 जारी करता है. TDS डेटा में किसी भी विसंगति के कारण आपके रिफंड की प्रॉसेस में देरी हो सकती है.

नोटिस और कम्यूनिकेशन का जवाब दें

कभी-कभी, आयकर विभाग आपके टैक्स रिटर्न से संबंधित प्रश्न पूछ सकता है या नोटिस जारी कर सकता है. ऐसे संचारों का तुरंत जवाब दें और रिफंड प्रॉसेस में किसी भी देरी से बचने के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करें.

सही ITR फॉर्म चुनें

अपने इनकम सोर्सेज और कैटेगरी के आधार पर उचित आयकर रिटर्न (ITR) फॉर्म का चयन करना महत्वपूर्ण है. गलत फॉर्म का इस्तेमाल करने से प्रॉसेसिंग में देरी हो सकती है और आपके रिफंड क्लेम को संभावित रूप से अस्वीकार किया जा सकता है.

Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Business Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.