नई दिल्ली: अगर आपने अभी तक आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है तो देर मत कीजिए क्योंकि 31 अगस्त के बाद रिटर्न दाखिल करने पर आपको जुर्माना भरना पड़ेगा. कर आकलन वर्ष 2019-20 में बगैर जुर्माने के आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त 2019 है. आयकर विभाग की ओर से आयकरदाताओं को आयकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तिथि के संबंध में लगातार एसएमएस भेजे जा रहे हैं, जिसमें यह भी बताया जा रहा है कि उनको आखिरी तिथि के बाद रिटर्न दाखिल करने पर 5,000 रुपये तक जुर्माना भरना पड़ सकता है.

मगर, 5,000 रुपये जुर्माना सिर्फ उन्हीं आयकरदाताओं को भरना पड़ेगा जिनकी कर योग्य आय वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान पांच लाख रुपये से अधिक रही है. चार्टर्ड अकाउंटेंट सी. के. मिश्रा ने बताया कि जिनकी कर योग्य आय उक्त वित्त वर्ष के दौरान पांच लाख रुपये से कम है, उनको 31 अगस्त के बाद सिर्फ 1,000 रुपये जुर्माना भरना पड़ेगा. मिश्रा ने बताया कि पांच लाख रुपये से अधिक आय वाले आयकरदाताओं को एक सितंबर से लेकर 31 दिसंबर 2019 तक आयकर रिटर्न दाखिल करने पर 5,000 रुपये और उसके बाद एक जनवरी 2020 से लेकर 31 मार्च 2020 तक आयकर रिटर्न दाखिल करने पर 10,000 रुपये जुर्माना भरना पड़ेगा, लेकिन जिनकी आय पांच लाख रुपये से कम है उनको 31 अगस्त 2019 के बाद 31 मार्च 2020 तक आयकर रिटर्न दाखिल करने पर सिर्फ 1,000 रुपये ही जुर्माना भरना पड़ेगा.

क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो जरूरी भरें आयकर रिटर्न
उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा कर आकलन वर्ष 2019-20 में पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में प्राप्त आय पर आयकर रिटर्न दाखिल किया जा रहा है. उनसे जब पूछा गया कि ऐसे लोग जो आयकर के दायरे में नहीं आते हैं क्या उनको भी आयकर रिटर्न दाखिल करना चाहिए. इस पर उन्होंने कहा कि जो लोग क्रेडिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं या विदेश के दौरे पर जाते हैं या फिर पैसों का अधिक लेन-देन करते हैं उनको अवश्य आयकर रिटर्न दाखिल करना चाहिए अन्यथा उनको आयकर विभाग का नोटिस मिल सकता है.

31 अगस्त है आखिरी तारीख
उन्होंने कहा कि खासतौर से जिनकी आय कर योग्य है उनको देर नहीं करनी चाहिए और जुर्माने से बचने के लिए 31 अगस्त से पहले आयकर रिटर्न दाखिल कर देना चाहिए. मिश्रा ने यह भी बताया कि पिछले आकलन वर्षो के दौरान जो आयकरदाता आयकर रिटर्न दाखिल करते रहे हैं उनको अवश्य आयकर रिटर्न दाखिल करना चाहिए अन्यथा उनको आयकर विभाग की ओर से नोटिस भेजा जा सकता है.