
Manoj Yadav
'बिजनेस' की खबरों में खास रुचि रखने वाले मनोज यादव को 'पॉलिटिकल' खबरों से भी गहरा लगाव है. ये इंडिया.कॉम हिंदी के बिजनेस डेस्क पर कार्यरत हैं. इनके पास ... और पढ़ें
Economic Survey 2024-25: भारत को अपनी आर्थिक वृद्धि दर को बनाए रखने के लिए अगले दो दशकों में बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत है. संसद में प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा 2024-25 के अनुसार, यदि भारत को उच्च विकास दर बनाए रखनी है, तो सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में लगातार निवेश बढ़ाने की आवश्यकता होगी.
समीक्षा में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में आम चुनावों और मानसून के कारण बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर खर्च प्रभावित हुआ. हालांकि, पिछले वर्ष जुलाई से नवंबर के बीच पूंजीगत व्यय में तेजी देखी गई, जिससे विकास कार्यों को गति मिली.
दस्तावेज़ के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय 2019-20 की तुलना में लगभग 3.3 गुना अधिक निर्धारित किया गया है. यह बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता देने की सरकार की मंशा को दर्शाता है.
समीक्षा में कहा गया है कि बुनियादी ढांचे के विकास में कुछ प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है:
समीक्षा में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत की शुद्ध शून्य उत्सर्जन (नेट जीरो) की प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है. इससे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी.
सरकार ने बुनियादी ढांचे में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं. समीक्षा में कहा गया है कि कार्यक्रम और परियोजना नियोजन, वित्तपोषण, निर्माण, रखरखाव, मौद्रीकरण तथा प्रभाव आकलन के माध्यम से निजी निवेश को आकर्षित करने की जरूरत है.
सरकार ने बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कई प्रमुख पहल की हैं:
राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन: प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए बनाई गई योजना.
राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन: सरकारी परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण के माध्यम से पूंजीगत व्यय को बढ़ावा देने की योजना.
पीएम-गति शक्ति योजना: मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करने और लॉजिस्टिक्स में सुधार के लिए एक समन्वित पहल.
गौरतलब है कि आर्थिक समीक्षा 2024-25 स्पष्ट रूप से बताती है कि भारत को अपनी उच्च आर्थिक वृद्धि बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे में निरंतर और बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा. सरकारी योजनाओं के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ावा देना आवश्यक है, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर सके.
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