नई दिल्ली: कच्चे तेल कीमतों के दो दशक के निम्न स्तर पर पहुंचने के दौरान अप्रैल-मई में कच्चे तेल की खरीद कर तीन रणनीतिक कच्चे तेल भंडारों को भर कर सरकार ने करीब 5,000 करोड़ रुपये की बचत की है. पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को यह जानकारी दी. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक है जिसने अपनी किसी भी आकस्मिकता को पूरा करने के लिए तीन स्थानों पर कच्चे तेल के भूमिगत रणनीतिक भंडारण तैयार किये हैं. Also Read - चीन ने कई जगहों पर नेपाल की जमीन पर अवैध कब्जा किया, भारतीय खुफिया एजेंसियां सतर्क

प्रधान ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, ‘‘अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कम कीमतों का फायदा उठाते हुए, भारत ने अप्रैल-मई, 2020 में एक करोड़ 67 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद करते हुये विशाखापत्तनम, मैंगलोर, और पाडुर में बनाए गए तीन रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों को भरा.’’ इस साल जनवरी में कच्चे तेल का दाम 60 डॉलर प्रति बैरल की तुलना में अप्रैल- मई के दौरान खरीदे गये कच्चे तेल की औसत लागत 19 डॉलर प्रति बैरल रही. Also Read - आज के समय में भारत के लिए क्यों जरूरी है 'क्वाड'? विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताए इसके मायने

उन्होंने कहा कि इससे 68 करोड़ 51.1 लाख डॉलर यानी 5,069 करोड़ रुपये की बचत हुई. उल्लेखनीय है कि दुनिया में कोरोना वायरस महामारी के दौरान कच्चे तेल की मांग में गिरावट आने से इसके दाम नीचे आ गये थे. Also Read - भारत के हाथ 35 वर्षों बाद लगी सफलता, ILO की गवर्निंग बॉडी की मिली अध्यक्षता

(इनपुट भाषा)