वॉशिंगटन: बेहतर निवेश और निजी खपत के दम पर भारत आने वाले समय में भी सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्था बना रहेगा.  वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण जहां बजट तैयार करने में जुटी हैं, वहीं विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2018-19 में 7.2 फीसदी रही, जो केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के 6.8 फीसदी के आंकड़े से काफी अधिक है. विश्वबैंक के मुताबिक, अगले तीन साल तक भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.50 प्रतिशत रह सकती है. विश्‍वबैंक ने मंगलवार को जारी अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 में भारत के 7.20 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने का अनुमान है.

बैंक की मंगलवार को जारी आर्थिक संभावना रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था अगले दो वित्त वर्षों में 7.5 फीसदी की रफ्तार से बढ़ेगी, जो कि सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपना शीर्ष स्थान बनाए हुए है. इसे ‘मौद्रिक नीति में ब्याज दरों में कटौती और कम मुद्रास्फीति द्वारा मदद मिलेगी.

विश्वबैंक की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के आंकड़े सामने आने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. सीएसओ के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर पांच साल के न्यूनतम स्तर 5.80 प्रतिशत पर आ गई. यह चीन की तुलना में कम है.

इस रिपोर्ट में भारत के लिए जनवरी में लगाए गए अनुमान को बरकरार रखा गया है. विश्व अर्थव्यवस्था के अनुमान में भारत के विकास दर के सबसे तेज रहने का अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल वैश्विक विकास दर तीन फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया था, जबकि इस साल इसमें तेज गिरावट आई और यह 2.6 फीसदी रही. अगले साल इसमें 2.7 फीसदी और और 2021 में 2.8 फीसदी वृद्धि होने का अनुमान लगाया गया है. बैंक ने कहा कि इन आंकड़ों का कट ऑफ तिथि 23 मई है.

सीएसओ ने अपनी रिपोर्ट में कृषि एवं विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि की दर सुस्त पड़ने को आर्थिक गतिविधियों में गिरावट के लिए जिम्मेदार बताया था. विश्वबैंक ने मंगलवार को जारी अपने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कहा कि वित्त वर्ष 2018-19 में भारत के 7.20 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने का अनुमान है.

बैंक ने कहा कि 2018 में चीन की आर्थिक वृद्धि दर 6.60 प्रतिशत रही. इस दर के गिरकर 2019 में 6.20 प्रतिशत, 2020 में 6.10 प्रतिशत और 2021 में 6 प्रतिशत पर आ जाने का अनुमान है.

सीएओ ने 31 मई को कहा था कि देश का सकल घरेलू उत्पाद वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 6.8 फीसदी रहा, जो कि पिछले साल के 7.2 फीसदी की तुलना में कम है.

सीएसओ ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार चौथी तिमाही में महज 5.8 फीसदी रहेगी, जिसके कारण समूची अर्थव्यवस्था में गिरावट आएगी.

इसके साथ ही भारत दुनिया की सबसे तेजी से वृद्धि करने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा. वर्ष 2021 तक भारत की आर्थिक वृद्धि दर चीन के छह प्रतिशत की तुलना में डेढ़ प्रतिशत अधिक होगी.

विश्वबैंक के अनुसार, 2019-20 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.50 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है. विश्वबैंक ने पिछले पूर्वानुमान में भी 2019-20 में वृद्धि दर 7.50 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया था. उसने कहा कि इसके बाद अगले दो वित्त वर्ष तक वृद्धि दर की यही गति बरकरार रहने वाली है.

रिपोर्ट ने कहा, मुद्रास्फीति रिजर्व बैंक के लक्ष्य से नीचे है, जिससे मौद्रिक नीति सुगम रहेगी. इसके साथ ही ऋण की वृद्धि दर के मजबूत होने से निजी उपभोग एवं निवेश को फायदा होगा.