भारतीय बैंकों ने 32 लाख अकाउंट्स की जानकारी लीक होने के बाद डेबिट कार्ड्स बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि इस बड़ी लीक को चीन से अंजाम दिया गया है। लोगों के पैसे अमेरिका और चीन में निकाले गए हैं जबकि कार्डधारक भारत से बाहर कहीं गया ही नहीं। एसबीआई समेत देश के अन्य बड़े बैंक इस लीक का शिकार हुए हैं। भले ही कस्टमर्स के हितों को बचाने के लिए बड़े कदम उठाए जा रहे हों फिर भी कुछ चीजें आप को ध्यान में रखनी चाहिए जब इतने बड़े स्तर पर कोई लीक हो।

इस पूरे मामले में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का निर्देश है, ‘सिक्यॉरिटी में सेंध के कारण कस्टमर को हुए किसी भी तरह के पैसे के नुकसान के लिए बैंक पूरी तरह से जिम्मेदार है।’ आरबीआई द्वारा जारी किए गए ड्राफ्ट के अनुसार कस्टमर द्वारा सूचित करने पर बैंक को 10 दिनों के भीतर कस्टमर के अकाउंट में गायब हुआ पैसा वापस करना होगा। साथ ही यह दिखाना होगा कि उसकी तरफ से किसी तरह का ट्रांजेक्शन नहीं हुआ है और कस्टमर का पैसा बिना उसकी जानकारी के गलत तरह से गायब हुआ है।

अभी तक यदि आप इस धोखाधड़ी से बचे हैं तो अच्छी बात है,फिर भी सावधान रहें लेकिन यदि आप भी शिकार हुये हैं तो पैसा गायब होने की स्थिति में सबसे पहला काम है कि तीन दिन के भीतर ही अपने बैंक को इसकी जानकारी देना। अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो बैंक पैसा देने के लिए बाध्य नहीं होगा। यह भी पढ़ें: 5 बैंकों के 32 लाख ATM पिन चोरी, ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

जांच में पाया गया कि डेटा सुरक्षा में यह सेंध हिताची पेमेंट्स सर्विसेज की प्रणाली में एक मालवेयर के जरिये हुई है। यह कंपनी यस बैंक को सेवा देती है। हिताची पेमेंट्स एटीएम सर्विसेज, प्वाइंट ऑफ सेल सर्विसेज, इमर्जिग पेमेंट्स सर्विसेज आदि के जरिये सेवाएं देती है और उसने कहा है कि उसकी प्रणाली में कोई सेंधमारी नहीं हुई है। वहीं यस बैंक ने सुरक्षा में सेंध की इस घटना से खुद को एक तरह से अलग करने की कोशिश करते हुए सेवा प्रदाताओं की बेहतर निगरानी पर जोर दिया है।

मालवेयर क्या है और कैसे करता है काम?

मालवेयर एक ऐसा प्रोग्राम होता है, जिसमें ट्रोजन, स्पाइवेयर, जैसे वायरसों से बनाया जाता हैं, जिसके जरिये सेंधमार एटीएम मशीन या बैंकों के सर्वर से डेटा चुरा सकते हैं। इस मामले में, वायरस के शिकार ऐसे किसी एटीएम मशीन पर अगर आपने कार्ड इस्तेमाल किया तो आपके एटीएम/डेबिट कार्ड का डेटा उस सेंधमार के हाथ लग जाएगा, जिसका वह दुरुपयोग कर सकता है।

बचने के लिए अपनाएं ये उपाय:

एटीएम के चोरी हुए पिन वा कार्ड से जुड़ी अन्य जानकारी की वजह से डेबिट/एटीएम कार्ड ब्लॉक किए गए हैं और इसके बदले बैंक आप को मुफ्त में दूसरा कार्ड बना कर देंगे। वहीं जिनका कार्ड ब्लॉक नहीं हुआ है, वे अपना एटीएम पिन बदल लें। इसके लिए आप एटीएम मशीन के अलावा एसएमएस या आईवीआरएस से या फिर इंटरनेट बैंकिंग के जरिये बिना बैंक जाए नए पिन बना सकते हैं। वहीं ज्यादातर बैंक आपको ज्यादा सुरक्षा मुहैया कराने के लिए कार्ड नेटवर्क कंपनी चुनने का विकल्प भी देती हैं। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा निकालते वक्त अधिकतम सीमा भी तय कर सकते हैं, जिससे ऐसी धोखाधड़ी का खतरा काफी घट सकता है।

ध्यान दें:

अपने एटीएम कार्ड पर उसके पीछ की तरफ अपने हस्ताक्षर जरूर करें। अपने एटीएम का पिन नंबर एक निर्धारित समय पर बदलते रहें। ऐसा देखा गया है कि लोग कई महीनों, कई बार तो सालों तक अपना एटीएम पिन नहीं बदलते हैं। आपको बता दें ऐसे कार्ड के डेटा चोरी होने का खतरा अधिक रहता है। अपने एटीएम पिन को फौरन बदलें। एसबीआई के अनुसार ये फ्रॉड पूरी बैंकिंग इंडस्ट्री को चपेट में ले सकता है। ऐसे में आपके लिए जरूरी है कि अपने एटीएम पिन को तुरंत चेंज करें।

एटीएम कार्ड या अपना पिन नंबर कभी भी किसी को न बताएं। भले ही कोई बैंक वाला भी आपसे आपका पिन पूछे तो उसे न बताएं। आपको बता दें कि नियमों के मुताबिक कभी भी कोई बैंक अपने ग्राहक से फोन, ईमेल, मैसेज या अन्य किसी भी माध्यम से उसका एटीएम पिन नहीं पूछ सकता।

कभी भी अपना एटीएम कार्ड और एटीएम पिन एक साथ न रखें। इसे कभी कार्ड पर न लिखें। कोशिश करें कि आप पिन नंबर को याद रखें, लेकिन कभी भी पिन नंबर अपनी जन्मतिथि से मिलता-जुलता न रखें। ऐसे पिन जल्दी हैक होते हैं।

जिस समय आप एटीएम का इस्तेमाल कर रहे हों, उस समय किसी अन्य व्यक्ति को एटीएम केबिन में न आने दें। अगर किसी स्थिति में ऐसा होता भी है और आपको लगता है कि आपका पिन किसी ने देख लिया है, तो जल्द से जल्द उसे बदल दें।

जिस समय आप एटीएम का इस्तेमाल कर रहे हों, उस समय एटीएम का कीपैड अपने हाथों से छुपा लें, ताकि कोई ये न देख सके कि आप क्या पिन डाल रहे हैं, ना ही वह आपके पिन नंबर का अंदाजा लगा सके।

अपनी ट्रांजैक्शन स्लिप को कभी भी एटीएम के अंदर न फेंकें, क्योंकि उस पर आपकी बहुत सी बैंकिंग डिटेल्स होती हैं। एटीएम में बहुत से लोग आते हैं, ऐसे में अगर वह स्लिप गलत हाथों में पड़ गई तो उसका दुरुपयोग हो सकता है। कोशिश करें कि स्लिप की पूरी तरफ से कई टुकड़ों में फाड़ कर ही फेंकें।

एटीएम से कोई भी ट्रांजैक्शन करने के बाद तब तक एटीएम के पास ही रुकें, जब तक कि मशीन दोबारा सो वेलकम वाला मैसेज द देने लगे। दरअसल, कभी-कभी लोग अपनी ट्रांजैक्शन करने के बाद जल्दबाजी में चले जाते हैं, जबकि कई बात मशीन के धीमे काम करने की वजह से उनकी ट्रांजैक्शन प्रक्रिया चल ही रही होती है। ऐसे में अगर आपके बाद कोई गलत व्यक्ति एटीएम में आता है तो वह आपकी एटीएम जानकारियों का दुरुपयोग कर सकता है।

अपना कार्ड कभी भी किसी ऐसी दुकान पर स्वाइप ना करें, जो संदिग्ध लगे। हो सकता है उसका कार्ड रीडर सिर्फ आपकी जानकारियां चुराने के लिए लगाया गया हो।

जैसे ही आप नया एटीएम कार्ड ले लें तो तुरंत अपना पुराना कार्ड नष्ट कर दें। साथ ही अपना मोबाइल नंबर बैंक अकाउंट के साथ जरूर रजिस्टर कराएं और एसएमएस अलर्ट जारी रखें, ताकि कोई भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन होने पर आपको पता चल जाए।