भारतीय बैंकों की सेहत में हो रहा है सुधार, मार्च 2025 तक एनपीए घटकर 2.4% होने की संभावना

फिच रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बैंकों का एनपीए मार्च 2025 तक 2.4% तक गिर सकता है. हालांकि, असुरक्षित ऋणों में तनाव बढ़ रहा है, लेकिन आर्थिक विकास, वसूली और नीतिगत मजबूती से बैंकिंग सेक्टर मजबूत बना रहेगा.

Published date india.com Updated: January 24, 2025 2:22 PM IST
भारतीय बैंकों की सेहत में हो रहा है सुधार, मार्च 2025 तक एनपीए घटकर 2.4% होने की संभावना

रेटिंग एजेंसी फिच की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बैंकों का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) रेश्यो मार्च 2025 तक घटकर 2.4 प्रतिशत हो सकता है. इसमें अगले साल तक 0.2 प्रतिशत की और गिरावट आने की संभावना है. एनपीए में गिरावट का मतलब है कि बैंकों की वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है और देश की अर्थव्यवस्था सही दिशा में आगे बढ़ रही है.

असुरक्षित ऋणों में बढ़ता दबाव

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खुदरा ऋण, खासतौर पर असुरक्षित ऋणों में तनाव बढ़ रहा है. छोटे व्यक्तिगत ऋण, विशेष रूप से 600 डॉलर (करीब 51,000 रुपये) से कम के लोन में सबसे अधिक दबाव देखा जा रहा है. इसका असर नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनियों (एनबीएफसी) और फिनटेक कंपनियों पर अधिक होगा, क्योंकि ये संस्थान मुख्य रूप से कम आय वर्ग के लोगों को ऋण देते हैं.

पिछले तीन वर्षों में ऋण वृद्धि की तेज रफ्तार

फिच की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 तक पिछले तीन वर्षों में असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण और क्रेडिट कार्ड उधारी क्रमशः 22 प्रतिशत और 25 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ी. हालांकि, जोखिम भार में वृद्धि के कारण चालू वित्त वर्ष (सितंबर 2024 तक) की पहली छमाही में यह वृद्धि क्रमशः 11 प्रतिशत और 18 प्रतिशत तक सीमित रह गई.

भारत में घरेलू कर्ज अभी भी कम

रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में घरेलू कर्ज, जून 2024 तक जीडीपी का 42.9 प्रतिशत था. यह अनुपात एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई अन्य देशों की तुलना में कम है. हालांकि, असुरक्षित खुदरा ऋणों का दबाव बढ़ रहा है और यह वित्त वर्ष 2025 की पहली छमाही में कुल बैड लोन का लगभग 52 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.

फिनटेक और एनबीएफसी पर असर

फिच का मानना है कि बैंकों के पास गैर-बैंकिंग संस्थानों और फिनटेक कंपनियों की फंडिंग के माध्यम से अप्रत्यक्ष जोखिम हो सकता है. ये कंपनियां आमतौर पर कम आय वर्ग के लोगों को लोन देती हैं, जिनकी आय का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं होता. रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा फाइनेंसियल सिस्टम में बकाया कंज्यूमर क्रेडिट का एक-तिहाई से अधिक हिस्सा ऐसे ही उधारकर्ताओं का है.

बैंकिंग सेक्टर की मजबूती बनी रहेगी

हालांकि कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन भारतीय बैंकिंग सेक्टर की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है. एनपीए में गिरावट, आर्थिक विकास और बेहतर ऋण वसूली से बैंकों की वित्तीय स्थिति में सुधार जारी रहेगा. फिच का मानना है कि मजबूत नीतियों और बैलेंस शीट में मजबूती से भारतीय बैंकिंग सेक्टर आगे भी अच्छा प्रदर्शन करेगा.

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