Indian Economy: भारतीय अर्थव्यवस्था उम्मीद से ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रही है और भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कमी करने के रुख को अब छोड़ सकता है. वैश्विक स्तर पर पूर्वानुमान लगाने वाली कंपनी ऑक्सफोर्ड इकनॉमिक्स की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है. Also Read - India Covid-19 Updates: देश में बीते 24 घंटों में 38 हजार नए केस और 480 की मौत, संक्रमितों का आंकड़ा 91 हजार पार

रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति औसतन छह फीसदी से अधिक रहेगी और केंद्रीय बैंक दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दरों को यथावत रखेगा. रिपोर्ट में बताया गया है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अक्टूबर में कोविड-19 से पूर्व के उच्चस्तर पर पहुंच गई है. ईंधन को छोड़कर अन्य श्रेणियों में दाम बढ़े हैं. Also Read - LIVE: कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों संग PM मोदी की बैठक शुरू, अमित शाह भी मौजूद

रिपोर्ट के मुताबिक, चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति अपने अधिकतम स्तर पर होगी और 2021 में हमें इस पर अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत होगी. अंडों और सब्जियों के दाम बढ़ने से अक्तूबर में खुदरा मुद्रास्फीति करीब साढ़े छह साल के उच्चस्तर 7.61 फीसदी पर पहुंच गई है. यह भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से कहीं ज्यादा है. Also Read - इस एक्टर ने कोरोना टेस्ट के वीडियो पोस्ट करने वाले सेलेब्स को लगाई फटकार, कहा- बंद करे...  

बता दें, सितंबर, 2020 में खुदरा मुद्रास्फीति 7.27 प्रतिशत पर थी.

मूडीज ने भी जताया था सुधार का अनुमान 

वैश्विक निवेश फर्म मूडीज ने भी 2020 के लिए भारत के विकास दर अनुमान में सुधार किया था. मूडीज के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था लंबे और सख्त लॉकडाउन के बाद वापसी कर रही है, लेकिन सुधार में अभी समय लगेगा.

जिसके कारण 2020 में विकास दर शून्य से 8.9 फीसदी नीचे रह सकती है. एसबीआई के चेयरमैन दिनेश कुमार खारा ने भी अर्थव्यवस्था के महामारी के दबाव से निकलने का अनुमान जताया था और कहा था कि 2021 में यह एक बार फिर तेजी की राह पर होगी.