क्रूड ऑयल की कीमतें अधिक होने के बावजूद FY2023-24 में 6.5% की दर से बढ़ेगी इंडियन इकोनॉमी

नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी का कहना है कि FY 2023-24 में भारत की 6.5% की दर से बढ़ेगी.

Published: September 21, 2023, 3:47 PM IST

नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी ने गुरुवार को कहा कि क्रूड ऑयल की कीमतें ज्यादा और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ी अनिश्चितता के बावजूद चालू वित्त वर्ष 2023-24 में इंडियन इकोनॉमी करीब 6.5% की दर से बढ़ेगी.

विरमानी ने यह भी कहा कि भारत में सकल घरेलू बचत अनुपात लगातार बढ़ा है.

नीति आयोग के सदस्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि मेरा वृद्धि अनुमान (भारत की GDP वृद्धि का) 6.5% है… क्योंकि मुझ लगता है कि वैश्विक GDP में उतार-चढ़ाव से कमोबेश सामंजस्य बैठा लिया गया है.

अमेरिका स्थित कुछ अर्थशास्त्रियों के भारत के आर्थिक वृद्धि को बढ़ा-चढ़ाकर बताने का दावा करने पर विरमानी ने कहा कि उन्होंने देखा है कि कुछ पूर्व अधिकारियों को यह पता नहीं था कि GDP का निर्माण कैसे किया जाता है क्योंकि वे अकादमिक पृष्ठभूमि से आए हैं.

वित्त मंत्रालय ने भी पिछले हफ्ते बढ़ी हुई GDP की आलोचना को खारिज किया था और कहा था कि उसने आर्थिक वृद्धि की गणना के लिए आय पक्ष के अनुमानों का इस्तेमाल करने की निरंतर प्रथा का पालन किया है. मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने पहली तिमाही के आंकड़ों को देखने के बाद अपने अनुमानों में बदलाव किया है.

भारत की 2022-23 की आर्थिक वृद्धि दर (GDP) 7.2 प्रतिशत रही थी, जो 2021-22 से 9.1 प्रतिशत कम है.

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुमान के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है.

प्रख्यात अर्थशास्त्री ने कहा कि भारत के लिए ‘‘क्रूड ऑयल की कीमतें’’ चिंता का विषय बनी है.

विरमानी ने कहा कि अगर हम 10 साल पहले की बात करें… सऊदी अरब और अमेरिका कमोबेश एक ही भू-राजनीतिक मंच पर थे और वे चीजों का समन्वय करते थे… लेकिन पिछले पांच वर्षों में यह स्थिति बदल गई है.

अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमतें 10 महीनों में पहली बार 90 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई. वर्तमान में 92 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं.

उन्होंने कहा कि हाल ही में, हमने देखा है कि जब तेल की कीमतें उचित स्तर पर आने लगीं तो उसने (सऊदी अरब ने) तेल उत्पादन में कटौती कर दी और रूस ने भी ऐसा ही किया.

विरमानी के अनुसार अल नीनो की स्थिति का इश्यू फिर सामने आया है और जलवायु परिवर्तन के कारण अनिश्चितता बढ़ गई है.

घरेलू बचत के पांच दशक के निचले स्तर पर गिरने के बारे में किए सवाल पर विरमानी ने कहा कि सकल घरेलू बचत नहीं, बल्कि शुद्ध घरेलू बचत गिर रही है.

उन्होंने कहा कि सकल घरेलू बचत अनुपात लगातार बढ़ा है. शुद्ध घरेलू बचत अनुपात कम हो रहा है क्योंकि कंज्यूमर लोन तेजी से बढ़ रहा है.

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