IRCTC Latest News Today:  देश में निजी ट्रेनों (Private Trains) को शुरू करने के सरकार के फैसले पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं. ऐसे में रेलवे ने स्पष्ट किया है कि ये ट्रेनें अतिरिक्त ट्रेन होंगी और इनका वर्तमान ट्रेनों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. रेलवे (Railway) के मुताबिक अप्रैल 2023 से करीब 151 नई निजी रेलगाड़ियां (151 private trains) शुरू होने की संभावना है. रेलवे की पूरी कोशिश है कि 3 साल के भीतर इन ट्रेनों को पूरी तरह से  शुरू किया जा सके. इसके लिए स्पेशल मैकेनिज्म तायार किया जा रहा है. खास बात यह है कि इन प्राइवेट ट्रेनों के किराए को लेकर जारी बहस के बीच रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव (VK Yadav) ने स्पष्ट किया है कि इन ट्रेनों का किराया फ्लाइट्स की तुलना में काफी कम होगा.Also Read - Indian Railways News: ऑनलाइन बुक किए गए टिकट पर कैसे बदलें बोर्डिंग स्टेशन का नाम, जानें- क्या है प्रक्रिया?

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने बताया कि निजी ट्रेनों का यात्रा किराया हवाई यात्रा किराए के अनुरूप प्रतिस्पर्धी होगा. सरकार ने करीब 5 फीसदी ट्रेनों के निजीकरण का फैसला किया है, जिसके तहत पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के अंतर्गत ये ट्रेन देश के अलग-अलग हिस्सों में दौड़ेंगी. बाकि की 95 फीसदी ट्रेन भारतीय रेलवे की तरफ से चलाई जाएंगी. Also Read - Dudhsagar Waterfall: भारी बारिश के कारण दूधसागर वाटरफॉल पर रोकनी पड़ी ट्रेन, रेल मंत्रालय ने शेयर किया शानदार वीडियो

इन ट्रेनों के चलाए जानें से उन यात्रियों को जरूर राहत मिलेगी, जिन्हें लंबी प्रतीक्षा सूची की वजह से मुश्किलें झेलनी पड़ती हैं. यानि, नई ट्रेनों के शुरू होने से वेटिंग लिस्ट में भी कमी आएगी, क्योंकि यात्रियों के पास यात्रा के लिए दूसरे ऑप्शन भी होंगे. Also Read - Train Accident Video: चलती ट्रेन में बुजुर्ग को चढ़ाने की कोशिश कर रहा था शख्स, दोनों चपेट में आए | वीडियो Viral

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन में प्राइवेट कंपनियों के उतरने से कई लाभ होंगे. जैसे कि रेलगाड़ियों को तेज गति से चलाने और रेल डिब्बों की प्रौद्योगिकी में नया बदलाव भी किया जा सकेगा. इसके साथ ही उन्होंने कहा- प्रौद्योगिकी बेहतर होती है तो रेलगाड़ी के जिन कोचों को वर्तमान समय में हर 4,000 किलोमीटर यात्रा के बाद रखरखाव की जरूरत होती है, उसमें भारी बदलाव आएगा और तब यह सीमा करीब 40,000 किलोमीटर हो जाएगी. मतलब, इन कोचों का महीने में एक या दो बार ही रखरखाव करना होगा. इसके साथ ही यादव ने ट्रेन के कोचों की खरीद में ‘मेक इन इंडिया’ पर भी जोर दिया है.