पिछले पांच वर्षों में, भारत में सॉफ्टवेयर-एस-ए-सर्विस (SAAS) फर्मो की संख्या दोगुनी हो गई है और देश में एसएएएस फर्मों का राजस्व 2025 तक 30 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है. मंगलवार को एक नई रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है. भारत में अब 13 एसएएएस यूनिकॉर्न्‍स हैं और सात से नौ कंपनियों के बीच वार्षिक रिक्युरिंग रेवेन्यु (ARR) में 100 मिलियन डॉलर से अधिक है.Also Read - AGS Transact Technologies IPO: 19 जनवरी को आ रहा है साल का पहला IPO, कंपनी के बारे में यहां जानें सब कुछ

प्रबंधन परामर्श फर्म बैन एंड कंपनी की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय एसएएएस कंपनियों में निवेश 2020 से 170 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2021 में बढ़कर 4.5 बिलियन डॉलर हो गया. मुख्य रूप से 50 मिलियन डॉलर से अधिक के सौदों की संख्या में वृद्धि हुई है. Also Read - LIC IPO: मार्च के मध्य में आएगा एलआईसी का आईपीओ, जानें- अभी तक की 10 अहम बातें

2021 में, 35 से अधिक भारतीय एसएएएस कंपनियों के पास 20 मिलियन डॉलर से अधिक एआरआर था. Also Read - Paytm Share Price: लोन वितरण में चार गुना से अधिक उछाल के बावजूद Paytm रिकॉर्ड निचले स्तर पर, निवेशकों को चेताया

फर्म के भारत के निजी इक्विटी और वैकल्पिक निवेशक अभ्यास के बारे में बैन एंड कंपनी पार्टनर और लीडर अर्पण शेठ ने कहा, “एसएएएस में बढ़ी दिलचस्पी के साथ, भारत ने समर्पित एसएएएस-केंद्रित फंडों के साथ-साथ कॉर्पोरेट उद्यम पूंजी (सीवीसी) और सॉवरेन वेल्थ फंड सहित नई निवेशक श्रेणियों की भागीदारी देखी है.”

2019-2021 में कुल डील वैल्यू में शीर्ष 10 निवेशकों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से 35 प्रतिशत थी, जिसमें टाइगर ग्लोबल (मूल्य के हिसाब से) और सिकोइया (वॉल्यूम के हिसाब से) 2020-2021 में सबसे अधिक सक्रिय रहे.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एसएएएस चार प्रमुख तरीकों से मूल्य निर्माण कर रहा है.

फ्रेशवर्क्‍स के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के साथ भारतीय रंर निकास की संख्या 2018 में 6 से 2021 में 100 प्रतिशत बढ़कर 12 हो गई, इसलिए बाहर निकलने में एक नई लहर की शुरूआत हुई.

इसके अलावा, भारतीय एसएएएस फर्मों ने अपने वैश्विक एसएएएस साथियों के अनुरूप उत्कृष्ट एआरआर-टू-फंडिंग अनुपात के साथ उच्च पूंजी दक्षता का प्रदर्शन किया है.

निष्कर्षों से पता चलता है, “चुनिंदा भारतीय कंपनियां अपने अमेरिकी समकक्षों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं. वर्तमान में, ये एसएएएस कंपनियां 62,000 से अधिक लोगों को रोजगार देती हैं, जो वास्तव में भारत में एसएएएस-प्रासंगिक कौशल वाले पेशेवरों का एक प्रतिभा पूल बनाने में मदद कर रही है.”

इसके अलावा, भारतीय एसएएएस कंपनियों के पूर्व कर्मचारियों द्वारा स्थापित 250 से अधिक नई भारतीय फर्मे अब 5,000 से अधिक लोगों को रोजगार देती हैं.

(With IANS Inputs)