भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंततः बाजार लाल निशान में ही बंद हुआ. बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट आई, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर सबसे अधिक असर पड़ा. विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली से बाजार पर नकारात्मक असर दिखा, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने खरीदारी का समर्थन किया.
शुक्रवार को कारोबार के अंत में सेंसेक्स 424 अंक (0.56%) टूटकर 75,311 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 117 अंक (0.51%) फिसलकर 22,795 पर आ गया. इस गिरावट का सबसे ज्यादा प्रभाव मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में देखने को मिला.
निफ्टी में ज्यादातर सेक्टर्स लाल निशान में नजर आए. खासतौर पर ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, एफएमसीजी, रियल्टी, मीडिया, एनर्जी और प्राइवेट बैंक इंडेक्स में गिरावट रही. केवल मेटल इंडेक्स हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहा.
सेंसेक्स में जहां कुछ स्टॉक्स ने मजबूती दिखाई, वहीं कुछ में भारी बिकवाली देखी गई.
टॉप गेनर्स: टाटा स्टील, एलएंडटी, एचसीएल टेक, एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी, टीसीएस, नेस्ले और बजाज फिनसर्व में मजबूती देखी गई.
टॉप लूजर्स: एमएंडएम, टाटा मोटर्स, सन फार्मा, पावर ग्रिड, जोमैटो, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, एक्सिस बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट भारी गिरावट के साथ बंद हुए.
व्यापक बाजार का मूड भी नकारात्मक रहा. बीएसई पर 2,245 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 1,698 शेयर हरे निशान में बंद हुए. वहीं, 117 शेयरों में कोई बदलाव नहीं देखा गया.
डॉलर इंडेक्स गिरकर 106.60 पर आ गया, लेकिन इसके बावजूद रुपये में कमजोरी बनी रही. डॉलर के मुकाबले रुपया 86.70 पर कारोबार करता दिखा. विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुपये पर दबाव बना रही है.
गुरुवार को एफआईआई ने 3,312 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची, जबकि डीआईआई ने 3,908 करोड़ रुपये का निवेश किया. इससे बाजार को कुछ हद तक सपोर्ट मिला, लेकिन बिकवाली के दबाव से उबर नहीं पाया.
शुक्रवार को बाजार की शुरुआत सापट रही. सुबह 9:30 बजे सेंसेक्स 79 अंक (0.11%) टूटकर 75,683 पर था, जबकि निफ्टी 19 अंक (0.09%) गिरकर 22,893 पर कारोबार कर रहा था. हालांकि, दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ.
विशेषज्ञों के अनुसार, एफआईआई की बिकवाली और वैश्विक संकेतों पर बाजार की चाल निर्भर करेगी. अगर अगले हफ्ते तक संस्थागत खरीदारी मजबूत नहीं होती, तो निफ्टी और सेंसेक्स में और गिरावट देखने को मिल सकती है.
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