क्रिसिल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025 में भारत की GDP वृद्धि दर 6.5% से 7% के बीच रह सकती है. मजबूत आर्थिक गतिविधियों और खपत में सुधार के चलते यह अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट बताती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ट्रेंड ग्रोथ के करीब पहुंच रही है.
इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में निजी खपत में तेजी देखी गई है. पहली तिमाही में निजी खपत 6.7% बढ़ी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह वृद्धि केवल 4.1% थी. इसके साथ ही, GDP में निजी खपत की हिस्सेदारी 56.3% तक पहुंच गई है, जो महामारी से पहले के दशक के 56.1% से अधिक है. यह संकेत है कि घरेलू मांग में सुधार हो रहा है.
हालांकि, निवेश वृद्धि दर में कुछ गिरावट दर्ज हुई है, लेकिन इसकी हिस्सेदारी अब भी महामारी से पहले के स्तर से अधिक बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, निवेश के मजबूत रहने से भविष्य में विकास दर को समर्थन मिलेगा.
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) मुद्रास्फीति भी सामान्य स्तर पर लौट रही है. पिछले वित्त वर्ष में यह -0.7% की गिरावट पर थी. लेकिन चालू वित्त वर्ष में यह औसतन 2.7% पर पहुंच गई है, जो महामारी से पहले के 5 साल के औसत 3.2% के करीब है. इसका मतलब है कि महंगाई अब नियंत्रण में है और अर्थव्यवस्था स्थिरता की ओर बढ़ रही है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अच्छे मानसून के कारण कृषि क्षेत्र में सुधार की संभावना है. इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ने का अनुमान है. यह सुधार अर्थव्यवस्था को संतुलित विकास की ओर ले जाएगा. कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ने से खपत और उत्पादन दोनों में तेजी आने की उम्मीद है.
क्रिसिल ने बताया कि महामारी के पहले दशक में औसत GDP वृद्धि दर 6.6% थी. मौजूदा वित्त वर्ष में यह दर 6.5% से 7% के बीच रहने की संभावना है. इसका अर्थ है कि अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे अपनी ट्रेंड ग्रोथ के करीब लौट रही है.
रिपोर्ट के अनुसार, खपत और मांग में सुधार के चलते अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनी रहेगी. कुल मिलाकर, अर्थव्यवस्था के सभी प्रमुख घटक मजबूत बने हुए हैं. क्रिसिल का मानना है कि वित्त वर्ष 2025 में भारत की विकास दर अधिक संतुलित रहेगी, भले ही यह पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम हो.
गौरतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियाद पर खड़ी है. खपत, निवेश और ग्रामीण क्षेत्रों में सुधार के संकेत हैं. अगर मौजूदा रुझान जारी रहा तो भारत की GDP वित्त वर्ष 2025 में 6.5% से 7% के बीच रह सकती है, जो एक सकारात्मक संकेत है.
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