मुंबई: कोरोना वायरस संक्रमण और इसकी रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन के कारण वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की जीडीपी को अभूतपूर्व झटका लगने का अनुमान है. भारत की विकास दर कई दशक के निचले स्तर 1.6 प्रतिशत पर आ सकती है. गोल्डमैन सैश ने यह अनुमान व्यक्त किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार हालात 1970 और 1980 के दशक के और 2009 के झटकों से भी गहरे हो सकते हैं. Also Read - कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित पांचवां देश बना भारत, इटली और स्पेन को पीछे छोड़ा

कोरोना वायर संकट से पहले भी नरमी के चलते वित्त वर्ष 2019-20 में देश की आर्थिक वृद्धि दरके अनुमान को घटा कर पांच प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था. महामारी के बाद आर्थिक हालत और बिगड़ी ही है. Also Read - आक्रामक स्वभाव के लिए मशहूर कगीसो रबाडा ने कहा- मैं जल्दी आपा नहीं खोता हूं

कई विश्लेषक कोरोना वायरस को देखते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को घटा रहे हैं. कुछ विश्लेषकों ने तो पहली तिमाही में जीडीपी में गिरावट तक की संभावना व्यक्त की हैं. Also Read - महाराष्ट्र में कोरोना वायरस से अब तक 3,000 की मौत, मामले 83,000 के करीब पहुंचे

गोल्डमैन के अर्थशास्त्रियों ने कहा कि भारत सरकार ने अभी तक इस संकट को लेकर आक्रामक रवैया नहीं दिखाया है. प्रयासों को तेज करने की जरूरत है.

गोल्डमैन के अर्थशास्त्रियों ने कहा, ”अभी तक की आर्थिक सहायता तथा आने वाले समय में इसे बढ़ाये जाने के अनुमान के साथ हमारा मानना है कि लॉकडाउन तथा लोगों की घबराहट के कारण मार्च व अगली तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में तेज गिरावट आने के अनुमान हैं.”

गोल्डमैन ने इससे पहले 22 मार्च के अनुमान में कहा था कि 2020-21 में भरत की वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत रह सकती है. अब उसने इसे घटाकर 1.6 प्रतिशत कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस बार हालात 1970 और 1980 के दशक के और 2009 के झटकों से भी गहरे हो सकते हैं.