नई दिल्ली। अर्थव्यस्था और महंगाई के मोर्चे पर मोदी सरकार को फिर झटका लगा है. एक तरफ जहां औद्योगिक उत्पादन गिरा है वहीं नवंबर माह में खुदरा मुद्रास्फीति भी बढ़ी है. औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर अक्तूबर में कम होकर 2.2 प्रतिशत रह गई, पिछले साल इसी माह में यह 4.2 प्रतिशत थी. वहीं,ईंधन, सब्जियों और अंडों के दाम बढ़ने से नवंबर महीने में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.88 प्रतिशत पर पहुंच गई. यह इसका 15 महीने का सबसे ऊंचा स्तर है. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के आज जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है.

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति अक्तूबर में 3.58 प्रतिशत पर थी. एक साल पहले नवंबर में यह 3.63 प्रतिशत थी. इससे पहले पिछले साल अगस्त में यह 5.05 प्रतिशत के उच्चस्तर पर थी. प्रोटीन वाले उत्पादों मसलन अंडों के दाम नवंबर में सालाना आधार पर 7.95 प्रतिशत बढ़े. इससे पिछले महीने अंडे की महंगाई 0.69 प्रतिशत थी.

ईंधन और बिजली खंड में मुद्रास्फीति 7.92 प्रतिशत रही, जो अक्तूबर में 6.36 प्रतिशत थी. नवंबर में सब्जियों के दाम एक साल पहले की तुलना में 22.48 प्रतिशत बढ़े. अक्तूबर में यह 7.47 प्रतिशत ऊंचे थे. हालांकि, दलहन दामों में गिरावट का सिलसिला जारी है. नवंबर में दालों के दाम सालाना आधार पर 23.53 प्रतिशत घट गए. कुल मिलाकर खाद्य खंड में नवंबर में मुद्रास्फीति 4.42 प्रतिशत रही, जो इससे पिछले महीने 1.9 प्रतिशत थी.

वहीं औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर अक्तूबर में घटकर 2.2 प्रतिशत पर आ गई। यह तीन महीने में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि का न्यूनतम स्तर है. पिछले साल अक्तूबर में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि 4.2 प्रतिशत थी. इस साल सितंबर में यह 4.14 प्रतिशत थी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कल कहा था कि जुलाई-सितंबर में वृद्धि दर में सुधार के बाद पिछली कुछ तिमाहियों से वृद्धि में गिरावट का सिलसिला रुका है. जुलाई सितंबर की तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रही है जो इससे पिछली तिमाही में 5.7 प्रतिशत के तीन साल के निचले स्तर पर आ गई थी.