नौकरी मिलना जितना मुश्किल होता था, अब उतना ही मुश्किल उसे छोड़ना भी होने जा रहा है. कोई भी नौकरी पाने में काफी दिक्कतों का सामना करना है. लेकिन अब नौकरी छोड़ने से पहले दस बार सोचना पड़ सकता है. पहले भी नोटिस पीरियड सर्व करने के लिए कहा जाता था, लेकिन लोग उसे बहुत हल्के में लेते थे. अब इसको और कठिन बनाया जाएगा, क्योंकि नौकरी छोड़ने से पूर्व किसी को यह अच्छे से पता होना चाहिए कि नौकरी छोड़ने का नतीजा क्या हो सकता है?Also Read - Jharkhand News: फर्जी भर्ती के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची पुलिस, ग्रामीणों से हिंसक झड़प में लाठीचार्ज

नोटिस पीरियड सर्व किए बिना नौकरी छोड़ना किसी को महंगा पड़ सकता है. गुजरात अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग के एक अहम फैसले के अनुसार, नोटिस पीरियड पूरा किए बिना नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारी से रिकवरी पर 18 फीसदी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) वसूला जाएगा. Also Read - EPFO Latest Update: EPFO ने नवंबर 2021 में जोड़े 13.95 लाख ग्राहक, 8.28 लाख लोग पहली बार बने मेंबर

बता दें, नोटिस पीरियड वो समय होता है जब आप इस्तीफा देकर कंपनी के प्रति अपनी जिम्मेदारी या फिर फर्ज निभाते हुए कुछ दिन और काम करते हैं. जीएसटी अथॉरिटी के ताजा फैसले के मुताबिक, अगर कोई कर्मचारी नोटिस पीरियड पूरा किए बिना नौकरी छोड़ता है, तो उसके फुल-एंड-फाइनल पेमेंट पर 18 फीसदी जीएसटी कट सकता है. Also Read - 56वीं बार एग्जाम देकर 10वीं में पास हुए, अब 12वीं करने जा रहे 77 साल के ये बुजुर्ग

जानिए- पूरा मामला

अहमदाबाद की एक निर्यात कंपनी एम्नील फार्मास्यूटिकल्स (Amneal Pharma) के एक कर्मचारी से शुरू हुआ था. जीएसटी अथॉरिटी ने यह फैसला कंपनी के एक कर्मचारी के तीन महीने का नोटिस पीरियड सर्व किए बिना नौकरी छोड़ने पर सुनाया है. बता दें, नोटिस पीरियड को लेकर अलग-अलग कंपनियों के नियम भी अलग-अलग होते हैं. ज्यादातर कंपनियों में यह एक महीने से लेकर तीन महीने तक ही होता है.

इस संदर्भ में GST अथॉरिटी ने अपने फैसले में कहा कि, ‘यह रकम जीएसटी एक्ट के तहत कर्मचारी छूट के तहत नहीं है, लिहाजा नोटिस पीरियड पूरा ना करने की शर्त पर 18 फीसदी जीएसटी चुकाना होगा. यह चार्ज नोटिस की अवधि में वेतन भुगतान की रिकवरी पर लगेगा.’ प्राधिकरण ने इसे ‘सहन न करने वाला कृत्य’ बताया और कहा कि राशि की वसूली निर्धारित नोटिस अवधि की सेवा के उल्लंघन के बदले में होगी. इतना ही नहीं, जीएसटी अधिनियम के मुताबिक, कर्मचारी छूट के तहत राशि को कवर नहीं किया जाएगा.