कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) जहां नौकरीपेशा लोगों के भविष्य को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण होता है, वहीं यह बेरोजगार होने की स्थिति में गाढ़े दिनों में भी काम आता है. लेकिन ऐसा देखने को मिला था कि ज्यादातर केस में लोग रिटायरमेंट की उम्र के पहले ही EPF अकाउंट में जमा पैसा निकाल लेते हैं. इसे देखते हुए अब ऐसा प्रावधान बनाने की योजना है जिससे संचित जमा ईपीएफ (accumulated EPF deposits) सिर्फ 75 फीसदी ही 60 साल से पहले निकाल सकते हैं.

एक महीने बिना नौकरी के रहने की स्थिति में सब्सक्राइबर ईपीएफ अकाउंट से पैसा निकालने की स्थिति में आ जाता है. पहले रिटायरमेंट से पहले ईपीएफ निकालने के लिए दो महीने बिना नौकरी के रहने का प्रावधान था. लेकिन श्रम विभाग ने आंकलन किया कि ज्यादातर केस में लोग रिटायरमेंट की उम्र के पहले ही अपने ईपीएफ अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं.

नोटिफिकेशन हुआ है जारी
कर्मचारी भविष्य निधि (अमेंडमेंट) स्कीम 2018 के अंतर्गत 6 दिसंबर को एक नोटिफिकेशन जारी हुआ. इसके मुताबिक, कमिश्नर या उनके समतुल्य कोई अन्य अफसर ऐसे शख्स को फंड निकालने की अनुमति दे सकता है, जो नौकरी छोड़ दिया हो और आगे करने का इच्छुक न हो. वहीं, वह एक महीने से ज्यादा तक बेरोजगार है और किसी भी कंपनी में नौकरी नहीं कर रहा है तो उसकी निधि का 75 फीसदी उसे दिया जा सकता है.

6 करोड़ से ज्यादा एक्टिव मेंबर
बता दें कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) संस्थागत और सेमी संस्थागत सेक्टर के कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा के फंड को मैनेज करता है. यहां रिटायरमेंट फंड 6 करोड़ से ज्यादा एक्टिव मेंबर का है, जो कि साल में कम से कम एक महीने में कंट्रीब्यूट किया जाता है.

कहां कितना कटता है
उदाहरण के तौर पर देखें तो यदि एक कर्मचारी 15 हजार रुपये प्रति महीना कमाता है तो वह अपने बेसिक सैलरी का 12% ईपीएफ में देता है. दूसरी तरफ नियोक्त 8.33 फीसदी कर्मचारी के पेंशन स्कीम में और 3.67 फीसदी ईपीएफ के लिए देता है. इसके साथ ही 0.5 फीसदी एम्पलाई डिपॉजिट लिंक्ड एंश्योरेंस (EDLI) स्कीम, 0.65 फीसदी EPF ACs और 0.1 फीसदी EDLI हैंडलिंग फीस के तौर पर देता है. ऐसे में देखा जाए तो उसका कुल योगदान 13.61 फीसदी का होता है.