कंपनी आपसे करवा रही 9 घंटे से ज्यादा काम, नहीं देती टाइम से सैलरी? इन 5 कानून से लड़िए अपने हक की लड़ाई

अगर आपको बिना कारण नौकरी से निकाला गया है या आपकी सैलरी रोकी गई है, तो आप अकेले नहीं हैं. भारतीय कानून आपके साथ है. ज़रूरत है तो बस अपने अधिकारों को जानने और कानूनी कदम उठाने की.

Published date india.com Published: December 11, 2025 10:50 PM IST
कंपनी आपसे करवा रही 9 घंटे से ज्यादा काम,  नहीं देती टाइम से सैलरी? इन 5 कानून से लड़िए अपने हक की लड़ाई
लॉन्ग वर्क आवर्स में भारत 12वें नंबर पर आता है.

हर साल 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है. मजदूर दिवस पर तो कंपनियां मजदूरों के हक की खूब बातें करती हैं. लेकिन, जब कुछ करने की बारी आती है, तो अक्सर ये आखिरी लाइन में खड़े मिलते हैं. ऊंची-ऊंची बिल्डिंग और बड़ी-बड़ी कंपनियों में अभी भी असाइनमेंट की डेडलाइन, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, परफॉर्मेंस, बोनस, अप्रेजल और प्रमोशन के नाम पर एम्प्लॉयी का शोषण किया जा रहा है.

कभी किसी को बिना कारण बताए नौकरी से निकाल दिया जाता है. कभी इतना परेशान किया जाता है कि वो खुद ही नौकरी से इस्तीफा दे दे. कंपनियां कभी एम्प्लॉयी की सैलरी रोक देती या आधी कर देती है. कभी कंपनी लॉस बताकर परफॉर्मेंस ही काट लेती है. कभी किसी को शिफ्ट टाइमिंग से ज्यादा समय तक काम करवाया जाता है. कंपनियों के कई नियमों की वजह से कर्मचारी काफी परेशान रहते हैं.

अगर आप भी कंपनी के इस तरह के रवैये से परेशान हैं, तो आपको बताते हैं कि आखिर कानून के हिसाब से क्या नियम हैं और ऐसी स्थिति में आप क्या कर सकते हैं:-

बिना कारण नौकरी से निकालना 
अगर किसी एम्प्लॉयी को बिना वजह के या पहले से सूचना दिए बगैर नौकरी से निकाला जाता है, तो यह अनुचित बर्खास्तगी यानी Unlawful Termination मानी जाती है. ऐसे केस में Industrial Disputes Act, 1947 के तहत आप कंपनी से लिखित में नौकरी से निकालने का कारण मांग सकते हैं. नोटिस पीरियड ले सकते हैं या मुआवजा भी क्लेम कर सकते हैं.

टाइम से सैलरी न देना 
कई कंपनियां एम्प्लॉयी को समय पर सैलरी नहीं देतीं. कुछ कंपनियों में महीने की आखिरी तारीख 30 या 31 को सैलरी क्रेडिट होती है, तो कुछ कंपनियां 10-12 तारीख तक सैलरी नहीं देती हैं. Payment of Wages Act के तहत ये अपराध है. इस कानून के मुताबिक, हर एम्प्लॉयी को महीने के 7वें या 10वें दिन तक सैलरी देना ही होगा. अगर टाइम से सैलरी नहीं मिलती है, तो आपके पास लेबर कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज कराने और सिविल कोर्ट में भी मामला दायर करने का ऑप्शन है.

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नोटिस पीरिएड सर्व करने का दबाव बनाए तो?
अगर एम्प्लॉयी नोटिस पीरियड पूरा नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है. हालांकि, अगर एम्प्लॉयी ने किसी बॉन्ड या समझौते पर साइन किए ,हैं तो कुछ मामलों में उसके खिलाफ नुकसान की वसूली के लिए कंपनी केस दर्ज करा सकती है.

नौकरी छोड़ने पर अगर कंपनी सैलरी रोक दे तो?
अगर कोई कंपनी किसी एम्प्लॉयी की सैलरी रोक लेती है या सैलरी देने से मना कर देती है, तो इसकी शिकायत की जा सकती है. अगर कर्मचारी ने काम किया है, तो उसे तय सैलरी हासिल करने का अधिकार है. अगर कंपनी सैलरी नहीं देती है, तो आपके पास लेबर कोर्ट या जिला कोर्ट में सीधे शिकायत करने का ऑप्शन है.

अगर शिफ्ट से ज्यादा काम करवाया जाए तो?
अगर एम्प्लॉयी से तय शिफ्ट से ज्यादा काम करवाया जाता है, तो एम्प्लॉयी का अधिकार है कि वो इसकी शिकायत कर सकता है. ऐसे में एम्प्लॉयी लेबर कोर्ट के इंस्पेक्टर या कमिश्नर से सीधे लिखित में शिकायत कर सकता है.

लॉन्ग वर्क आवर्स में भारत 12वें नंबर पर
दुनिया में ऐसे कई देश हैं, जहां एम्प्लॉयीज लॉन्ग वर्किंग आवर्स से परेशान हैं. इस लिस्ट में भारत 12वें नंबर पर आता है. सबसे ज्यादा वर्किंग आवर्स भूटान में है, जहां एम्प्लॉयीज एक हफ्ते में 54.4 घंटे काम करते हैं. दूसरे नंबर पर यूनाइटेड अरब अमीरात आता है. यहां कर्मचारियों को हफ्ते में 50.9 घंटे काम करना पड़ता है. तीसरे नंबर पर लेसोथो है, जहां 50.4 घंटे वर्क आवर्स है.

चौथे नंबर पर कांगो (48.46 घंटे), पांचवें नंबर पर कतर (48 घंटे), छठे नंबर पर लाइबेरिया (47.7 घंटे), सातवें नंबर पर मॉरिटानिया (47.6 घंटे), आठवें नंबर पर मंगोलिया (47.3 घंटे), नौवें नंबर पर जॉर्डन (47 घंटे), दसवें नंबर पर बांग्लादेश (46.9 घंटे), ग्यारवें नंबर पर पाकिस्तान (46.9 घंटे), बारहवें नंबर पर भारत (46.7 घंटे) है. इसके बाद चीन का नंबर आता है. यहां एक हफ्ते में 46.1 घंटे का वर्क आवर्स है.

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