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मुंबई, 30 नवंबर | आगामी सप्ताह में निवेशकों की निगाह मुख्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा और संसद के चालू शीतकालीन अधिवेशन पर टिकी रहेगी। सोमवार 1 दिसंबर को बेहतर विकास दर के आंकड़ों की प्रतिक्रिया में बाजार में तेजी दर्ज की जा सकती है। सरकार ने विकास दर के आंकड़े शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद जारी किए। Also Read - वैश्विक बिकवाली का दबाव: सेंसेक्स में भारी गिरावट, निफ्टी 10,800 अंक पर आया

मौजूदा कारोबारी साल की दूसरी तिमाही में देश की विकास दर साल-दर-साल आधार पर 5.3 फीसदी रही, जो प्रथम तिमाही में 5.7 फीसदी थी। हालांकि विकास दर घटी है, लेकिन यह विश्लेषकों के अनुमान से बेहतर है। आगामी सप्ताह में वाहन कंपनियों के शेयरों पर नजर रहेगी, क्योंकि एक दिसंबर से ये कंपनियां नवंबर में हुई बिक्री के आंकड़े जारी करेंगी। Also Read - CBI ने 5 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में दो GST अधिकारियों पर मामला दर्ज किया

निवेशकों की निगाह सरकारी तेल विपणन कंपनियों पर भी रहेगी, क्योंकि ये कंपनियां तेल मूल्य की समीक्षा करेंगी। तेल कंपनियां हर महीने के बीच में और आखिर में गत दो सप्ताह में आयातित तेल की औसत कीमत के आधार पर तेल मूल्य की समीक्षा करती हैं। रिजर्व बैंक मंगलवार दो दिसंबर को मौद्रिक नीति की समीक्षा करेगी। बैंक यदि मुख्य दरों में कटौती की घोषणा करता है, तो इसका शेयर बाजार पर अनुकूल असर पड़ेगा और प्रमुख सूचकांक एक बार फिर नई ऊंचाई छू सकते हैं।

संसद का शीतकालीन सत्र 24 नवंबर से जारी है। यह 23 दिसंबर को समाप्त होगा। इस सत्र में आर्थिक महत्व के कई विधेयकों से संबंधित घटनाक्रमों पर निवेशकों की निगाह रहेगी। इस सत्र में बीमा कानून (संशोधन) विधेयक, भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास व पुनस्र्थापना जैसे विधेयकों को पारित करने की कोशिश की जा सकती है। सरकार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संविधान संशोधन विधेयक पर भी कदम आगे बढ़ा सकती है।

आगामी सप्ताह में विदेशी संस्थागत निवेश के आंकड़ों, वैश्विक बाजारों के रुझान, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल और तेल के मूल्य पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी। निवेशकों की निगाह आगामी सप्ताह में कच्चे तेल की अंतर्राष्ट्रीय कीमत पर भी टिकी रहेगी। हाल के महीनों में तेल मूल्य में काफी गिरावट दर्ज की गई है। इसी का फायदा उठाते हुए सरकार ने डीजल मूल्य को नियंत्रण मुक्त भी कर दिया है। कच्चे तेल की कीमत घटने से सरकार को चालू खाता घाटा और ईंधन महंगाई दर कम करने में मदद मिलेगी। देश को अपनी जरूरत का 80 फीसदी तेल आयात करना पड़ता है।