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नई दिल्ली, 19 दिसम्बर | देश की विकास दर मौजूदा कारोबारी साल में 5.5 फीसदी रह सकती है। यह बात शुक्रवार को संसद में प्रस्तुत मध्यावधि समीक्षा में कही गई। मध्यावधि समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, कारोबारी साल की पहली छमाही में विकास दर 5.5 फीसदी रही है। बजटीय आय-व्यय की स्थिति के आधार पर वित्त मंत्रालय ने रिपोर्ट में कहा कि बजटीय घाटा अनुमान के अनुरूप रहेगा। Also Read - कोरोना से उबरे गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं

रिपोर्ट के मुताबिक, कारोबारी साल के मार्च में समाप्त होने तक भारतीय रिजर्व बैंक की ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं है। रिपोर्ट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय तेल मूल्य में गिरावट से चालू खाता घाटा कम करने में मदद मिलेगी। कीमत पांच साल के निचले स्तर पर है। जून में यह कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक थी, जो अब करीब 58 डॉलर प्रति बैरल है। Also Read - क्या सिचाचिन में तैनात जवानों को नहीं मिल रही भरपूर कैलोरी की मात्रा? सरकार ने दिया ये जवाब

दूसरी तिमाही की विकास दर 5.3 फीसदी रही है, जो प्रथम तिमाही में 5.7 फीसदी थी। इस बीच उपभोक्ता महंगाई दर नवंबर में 4.38 फीसदी रही, जो एक साल पहले समान अवधि में 11.16 फीसदी थी। इसके साथ ही औद्योगिक उत्पादन में अक्टूबर में 4.2 फीसदी गिरावट दर्ज किए जाने के कारण रिजर्व बैंक से दरों में कटौती करने की उम्मीद बढ़ गई है।

विकास दर 2013-14 में लगातार दूसरे साल पांच फीसदी से कम 4.7 फीसदी रही थी।