कोविड-19 संकट से जुड़े व्यवधानों के चलते गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) का नकदी संकट और बढ़ सकता है. वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक इससे इन कंपनियों की परिसंपत्ति गुणवत्ता और खराब होगी जो जिससे इन कंपनियों का नकदी संकट और गहरायेगा. Also Read - बढ़ते लॉकडाउन और कोरोना के प्रभाव से परेशान हो गए हैं रणवीर सिंह, बोले- तबाह कर देने जैसा है

मूडीज ने एक रपट में कहा कि कोविड-19 संकट के बीच लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां बाधित हुई हैं. इससे अर्थव्यवस्था में पहले से जारी नरमी के और विकट होने की संभावना है. इसका सीधा असर एनबीएफसी की परिसंपत्ति गुणवत्ता पर पड़ेगा. Also Read - Coronavirus In India Update: संक्रमितों का आंकड़ा 1 लाख 51 हजार के पार, इस राज्य में सबसे अधिक मामले

परिसंपत्ति गुणवत्ता से आशय वितरित ऋण की ग्राहकों द्वारा उचित अदायगी से है. चूंकि अर्थव्यवस्था में नरमी की वजह से लोगों की वित्तीय क्षमता प्रभावित हुई है इससे ग्राहकों के एनबीएफसी का कर्ज चुकाने में अड़चन का जोखिम भी बढ़ेगा. Also Read - कोविड-19 जांच के लिए 4,500 रुपए की सीमा हटाई गई, अब राज्य और निजी प्रयोगशालाएं तय करेंगी कीमत

मूडीज की रपट के अनुसार एनबीएफसी की परिसंपत्ति गुणवत्ता बैंकों से ज्यादा प्रभावित होंगी, क्योंकि ये कंपनियां ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों को ऋण उपलब्ध करातीं हैं.

मूडीज के मुताबिक सितंबर 2018 में आईएलएफएस समूह के विभिन्न भुगतान दायित्वों में असफल होने के बाद एनबीएफसी का नकदी संकट बढ़ गया था. अब कोविड-19 महामारी से एनबीएफसी की यह परेशानी और बढ़ सकती है.

इसके अलावा रिजर्व बैंक द्वारा विभिन्न ऋण किस्तों के भुगतान पर तीन महीने की रोक का विकल्प दिये जाने से निकट अवधि में एनबीएफसी की नकदी हालत और तंग हो सकती है.